जैवविविधता पर मानवीय गतिविधियों के बढ़ते असर ने होने वाला नुकसान भी बढ़ता जा रहा है। इससे लाखों प्रजातियों के लुप्त होने का ख़तरा बढ़ा है। जिसके लिए भूमि व समुद्र के इस्तेमाल के तौर-तरीक़ों में बदलाव, जलवायु परिवर्तन प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों के दोहन, जैसे कारणों को माना गया है।
जैवविविधता का अर्थ, पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीवन और उनके प्राकृतिक परिवेश में विविधता से है। जैसेकि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े, बैक्टीरिया, अन्य सूक्ष्मजीव, वन, नदियाँ, घास के मैदान, रेगिस्तान, भोजन के अलग-अलग प्रकार।
आर्मिनिया की राजधानी येरेवान में पिछले दो सप्ताह से जारी यूएन जैवविविधता सम्मेलन (कॉप17) का समापन हो गया है। शनिवार को इस सम्मेलन के समापन पर एक रोडमैप (Yerevan Pathway) पर सहमति बनी है, जिसके ज़रिए प्रकृति संरक्षण के प्रयासों में तेज़ी लाई जाएगी।
यूएन रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन के दौरान एक वैश्विक समीक्षा में यह स्पष्ट हो गया था कि दुनिया अपने जैवविविधता लक्ष्यों को पाने से अभी दूर है, जबकि इसके लिए चार वर्ष का समय ही शेष है। समेलन का समापन इन घोषणाओं के साथ हुआ-
जैवविविधता को बचाने के लिए दो अरब डॉलर की धनराशि।
संरक्षण प्रयासों में आदिवासी समुदायों की भूमिका को मज़बूती।
प्रकृति को सहेज कर रखने के लिए तयशुदा लक्ष्यों को 2030 तक हासिल करने की कार्रवाई में तेज़ी।
येरेवान रोडमैप में ‘कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैवविविधता फ़्रेमवर्क’ के 23 लक्ष्यों को पूरा करने के इरादे से प्राथमिकताओं को तय किया गया है। इस फ़्रेमवर्क का सबसे अहम लक्ष्य ‘30 by 30’ है, जिसमें वर्ष 2030 तक पृथ्वी के कम से कम 30 प्रतिशत भूमि और समुद्री क्षेत्रों का संरक्षण किया जाना है।
इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और आक्रामक प्रजातियों (invasive species) जैसी चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ संरक्षण के लिए धन जुटाने तथा पर्यावरण को नुक़सान पहुँचाने वाली आर्थिक नीतियों में सुधार पर भी ज़ोर दिया गया है।
अनेक मोर्चों पर प्रगति
जैविक विविधता पर सम्मेलन (CBD) की कार्यकारी सचिव एस्ट्रिड शोमेकर के अनुसार, प्रकृति का वास्तविक संरक्षण तब तक संभव नहीं है जब तक पर्यावरण और प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों या विध्वंस के लिए मिलने वाले वित्तीय संसाधनों (सब्सिडी या निवेश) को रोका नहीं जाता और उन्हें संरक्षण की दिशा में नहीं मोड़ा जाता।
इसके मद्देनज़र, येरेवान रोडमैप में सभी देशों से उन सब्सिडी को समाप्त करने का आग्रह किया गया है, जिनसे प्रकृति को नुक़सान पहुँचता है, जैसेकि जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) के इस्तेमाल के लिए।
साथ ही, विकासशील देशों के लिए वित्तीय, वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन को बढ़ाया जाना होगा।
राष्ट्रीय बजट से जुड़े और आर्थिक निर्णयों को भी जैवविविधता फ़्रेमवर्क के अनुरूप बनाए जाने की अपील की गई है और निगरानी व रिपोर्ट तैयार करने के लिए भी ठोस क़दम उठाने होंगे।
येरेवान सम्मेलन के दौरान सम्बद्ध पक्षों ने लगभग 50 निर्णयों को पारित किया है, जिनमें संरक्षित इलाक़े व वन, वन्यजीवन प्रबन्धन, आक्रामक प्रजातियाँ, समुद्री व तटीय जैवविविधता और सिंथेटिक बायोलॉजी समेत अन्य विषय पर फ़ैसले लिए गए हैं।
इसके अलावा, सात गाइडलाइन्स पर भी सहमति बनी हैं, जिनमें एक नए स्थाई निकाय के लिए नियम तय किए घए हैं, जोकि जैवविविधता नीतियों में आदिवासी व स्थानीय समुदायों की भूमिका को मज़बूती देने पर लक्षित होगा।
वित्तीय संसाधन
जैवविविधता संरक्षण प्रयासों के लिए लगभग दो अरब डॉलर धनराशि की भी घोषणा की गई है, जिसमें 56 करोड़ डॉलर वैश्विक पर्यावरण केन्द्र को मुहैया कराया जाएगा। विलुप्त होने का जोखिम झेल रही प्रजातियों को उबारने के लिए 50 करोड़ डॉलर की व्यवस्था की गई है।
33 करोड़ डॉलर, प्रकृति कोष के लिए आवंटित किया गया है, जोकि निजी पूंजी की लामबन्दी पर केन्द्रित है।
एशियाई विकास बैंक ने एक नया जैवविविधता बॉन्ड और निवेश के विचारों को प्रोत्साहन देने की पहल शुरू की है, और जैवविविधता की निगरानी व जवाबदेही के लिए नए संकेतक तय किए गए हैं।
बहुपक्षवाद का समर्थन
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की कार्यकारी निदेशक इन्गेर ऐंडरसन ने कहा कि येरेवान में हमने पर्यावरण के मुद्दे पर बहुपक्षवाद की जीत को देखा है.
“देश एक साथ आए, समझौते की भावना की तलाश पूरी हुई है और हमें उन महत्वपूर्ण निर्णयों पर सहमति का अवसर मिला, जिनसे आमजन व पृथ्वी के लिए वास्तविक प्रगति को समर्थन मिलेगा।”
जैवविविधता पर अगला सम्मेलन इक्वाडोर में दो वर्ष बाद होगा, जब लक्ष्यों को हासिल करने की समयसीमा दो वर्ष ही बचेगी।
जैवविविधता कन्वेंशन पर संयुक्त राष्ट्र की कार्यकारी सचिव एस्ट्रिड शोमेकर ने कहा कि अन्तत: परीक्षा यह नहीं है कि येरेवान में देशों की सरकारों ने क्या तय किया। बल्कि यह है कि उनके घर लौटने के बाद क्या बदलाव आएगा।