रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाली भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए दक्षिण अफ़्रीकी न्यायविद नावी पिल्लई का नाम चुना गया है। उन्होंने नेल्सन मंडेला और रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने वाले अन्य लोगों का बचाव किया था। इस चुनाव के साथ अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार पाने की चाह एक बार फिर से धुंधली हो गई है।

भारतीय मूल की नावी पिल्लई को शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।इस पुरस्कार की घोषणा नॉर्वेजियन नोबेल समिति के जोर्गेन वाट्ने फ्राइडनेस ने की। हालाँकि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से इस पुरस्कार का हक़दार खुद को बता रहे थे।

नोबेल प्राइज़ समिति द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर साझा एक पोस्ट में कहा गया है कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम ‘नावी’ पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है।

नावी पिल्लई की उम्र 85 वर्ष है। उनका जन्म 23 दिसंबर 1941 में एक भारतीय तमिल परिवार में दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में हुआ था। वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में नियुक्त होने वाली पहली अश्वेत महिला न्यायाधीश भी थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।इसके अलावा वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) और रवांडा ट्रिब्यूनल की न्यायाधीश भी रह चुकी हैं।

बीते वर्ष साल 2025 का शांति का नोबेल पुरुस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो को दिया गया था। शांति के लिए नोबल जीतने वाली नावी पिल्लै को 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना मिलेंगे। यह भारतीय मुद्रा में करीब 11.66 करोड़ रुपए होते हैं। उन्हें 10 दिसंबर को ओस्लो में पुरुस्कार दिया जाएगा।

बताते चलें कि नोबेल समिति ने ट्रंप के नाम पर विचार न करते हुए नावी पिल्लई को यह पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे थे लेकिन उन्हें एक बार फिर से निराशा हाथ लगी है। ट्रंप दावा करते हैं कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं, इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।

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