माइंड-रीडिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से देखी गई इमेज को फिर से बनाना मुमकिन

वैज्ञानिकों ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम डेवलप किया है जो किसी इंसान के दिमाग में चल रही एक्टिविटी के आधार पर यह अंदाज़ा लगा सकता है कि वह क्या देख रहा है और उसकी इमेज फिर से बना सकता है।

इस टेक्नोलॉजी को ब्रेन आईटी (Brain IT) नाम दिया गया है। इसे वाइज़मैन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस ( Weizmann Institute of Science) के रिसर्चर्स ने तैयार किया है। रिसर्च के दौरान, अलग-अलग इमेज देखते समय फंक्शनल MRI स्कैन के ज़रिए लोगों के दिमाग में एक्टिविटी के खास पैटर्न की पहचान की गई।

नतीजों से पता चला कि यह टेक्नोलॉजी अलग-अलग चीज़ों, खाने, चेहरों, लैंडस्केप और दूसरे मुश्किल विज़ुअल सीन की पहचानी जा सकने वाली इमेज को फिर से बना सकती है।

हालांकि इस टेक्नोलॉजी को कभी-कभी ‘माइंड रीडिंग’ भी कहा जाता है, लेकिन Brain-IT किसी इंसान के दिमाग में चल रहे विचारों को अपने आप नहीं पढ़ता है। इसके लिए इंसान को MRI स्कैनर के अंदर होना पड़ता है और एक इमेज देखनी पड़ती है, जिसके दौरान सिस्टम दिमाग में होने वाली एक्टिविटी के आधार पर इमेज का एक अनुमानित वर्शन बनाता है।

इस टेक्नोलॉजी की एक खास बात यह है कि यह नए लोगों के दिमाग के पैटर्न के हिसाब से जल्दी ढल जाती है। पुराने तरीकों में किसी नए इंसान से काम के नतीजे पाने के लिए कई घंटों के ब्रेन स्कैन डेटा की ज़रूरत होती थी, जबकि Brain-IT में किसी नए इंसान के बारे में जानने में करीब एक घंटा लगता है।

रिसर्चर्स ने अलग-अलग लोगों के दिमाग में आम पैटर्न पर फ़ोकस करके यह कामयाबी हासिल की। उन्होंने दिमाग की एक्टिविटी को हज़ारों बहुत छोटे हिस्सों में बांटा और उनमें ऐसे सिग्नल पहचाने जो देखने में आने वाली चीज़ों, जैसे रंग और जगह, के साथ-साथ चेहरे, खाना और खेल जैसे ऊँचे लेवल के क्लासिफ़िकेशन से जुड़े थे।

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