तुर्की के दुरूपिनार (Durupınar) इलाके में स्थित नाव के आकार की एक रहस्यमयी चट्टानी संरचना के अंदर की जांच के लिए पहली बार एक विशेष अंडरग्राउंड ड्रोन (Gopher Drone) की मदद ली जा रही है।
इस्तांबुल टेक्निकल यूनिवर्सिटी, एग्री इब्राहिम सिसिन यूनिवर्सिटी और यूनाइटेड स्टेट्स में एंड्रयूज यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स 2021 से तुर्की में अरारत माउंटेन रेंज में मौजूद आर्क के आकार की चट्टान पर रिसर्च कर रहे हैं। नोआ आर्क के अंदर की तस्वीरें पहली बार ज़मीन के नीचे के ड्रोन से ली गई हैं।
नोआ आर्क तक पहुंचने के लिए तुर्की सरकार की इजाज़त से काम कर रही इंटरनेशनल टीम ने ज़मीन के नीचे एक गहरा गड्ढा खोदा और कोर ड्रिलिंग से बने छेदों में गोफर ड्रोन मशीन को उतारा। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व तुर्की के सिवास कम्हुरियत विश्वविद्यालय के पुरातत्व प्रोफेसर डॉ. सेंगकर अतीला (Dr. Cenker Atila) और अमरीकी संस्था ‘नोआ आर्क स्कैन्स’ (Noah’s Ark Scans) की संयुक्त टीम कर रही है।
यह खोज अभियान सितंबर 2026 में काफी चर्चा में रहा। शोधकर्ताओं सहित कई लोगों का मानना है कि यह स्थान बाइबिल और धार्मिक ग्रंथों में वर्णित ऐतिहासिक ‘नोआ आर्क’ (नूह की कश्ती) का अंतिम विश्राम स्थल हो सकता है।
माना जाता है कि यह आर्क के आकार की चट्टान पैगंबर नूह की आर्क है, जो अब फॉसिल्स में बदल गई है, जिसे दुरुपनार साइट नाम दिया गया है। रिसर्चर्स दुरुपनार पर फोकस कर रहे हैं, जो 538 फीट की जियोलॉजिकल स्ट्रक्चर है और लिमोनाइट से बनी है। यह तुर्की के एग्री प्रोविंस में डोगुबायज़िट शहर के पास, तुर्की और ईरान के बॉर्डर पर माउंट अरारत की चोटी से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण में है।
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्वी तुर्की में माउंट अरारत के पास विवादित दुरुपिनार साइट की जांच कर रहे रिसर्चर्स ने गोफर नाम के एक खास ज़मीन के नीचे के ड्रोन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) के जरिए ज़मीन के नीचे कुछ खाली जगहों, सीधे गलियारों और कमरों जैसी संरचनाओं (Voids and Corridors) की जानकारी सामने आई है। यह ड्रोन बिना किसी बड़ी खुदाई के, एक छोटे बोरहोल के रास्ते अंदर पहुंचकर हाई-डेफिनिशन तस्वीरें, वीडियो और मिट्टी के सैंपल ले रहा है।
ऑस्ट्रेलियाई रोबोटिक्स एक्सपर्ट्स ने इस ड्रोन को खास तौर पर तंग जगहों पर घूमने के लिए डिज़ाइन किया है ताकि बिना ज़्यादा खुदाई के ज़मीन के नीचे की जगहों की जांच की जा सके।
शुरुआती जांच में बड़ी मात्रा में ऑर्गेनिक मटीरियल की मौजूदगी का पता चला है, जबकि इस स्ट्रक्चर के अंदर ठोस चट्टान की परत का पूरी तरह से न होना भी देखा गया है। काम के दौरान तमाम मुश्किलों के बावजूद, साइंटिस्ट्स को अब तक 18 मीटर तक की गहराई से सैंपल मिले हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि खुदाई के दौरान मिले मिट्टी और लकड़ी जैसे सैंपल्स को और ज़्यादा डिटेल्ड कार्बन और मिनरल एनालिसिस के लिए भेजा गया है। साइंटिस्ट्स के मुताबिक, पूरी लैब टेस्टिंग पूरी होने के बाद फाइनल रिजल्ट्स सामने आएंगे।