एआई की रेस में डेटा भारत का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है: टेक दिग्गज सीपी गुरनानी

भारत के आईटी व टेक सेक्टर की महत्वपूर्ण हस्ती सी पी गुरनानी के मुताबिक़, भारत को केवल बड़ी-बड़ी एआई तकनीक या इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की रेस में भाग लेने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, भारत को अपने पास मौजूद डेटा का इस्तेमाल करके जल्दी से जल्दी ऐसे नए, सस्ते और असरदार एआई टूल्स बनाने पर ध्यान देना चाहिए जो आम लोगों और देश के काम आ सकें।


‘भारत को केवल महंगे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर या मॉडल बनाने की रेस में शामिल होने के बजाय अपने बड़े डेटा का इस्तेमाल स्थानीय भाषाओं और किसानों जैसे आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले सस्ते एप्लिकेशन्स बनाने में करना चाहिए।’ ऐसा मानना है सी पी गुरनानी का। भारतीय उद्यमी गुरनानी वर्तमान में टेक महिंद्रा के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

इस भारतीय उद्यमी के अनुसार, भारत दुनिया की डेटा राजधानी है और यह डेटा एआई की रेस में देश का सबसे बड़ा हथियार बन सकता है। भारत के आईटी व टेक सेक्टर की एक एक बेहद महत्वपूर्ण शख्सियत होने के साथ सी पी गुरनानी AIONOS के को-फाउंडर व VC भी हैं।

उनका मानना है कि भारत के पास न सिर्फ डेटा का बहुत बड़ा खजाना है बल्कि देश एआई की दुनिया में सबसे आगे निकल सकता है। इसके लिए उनका सुझाव है कि इस डेटा का सही इस्तेमाल करके ऐसे एआई ऐप्स बनाने होंगे जो आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और स्थानीय समस्याओं को हल कर सकें।

इस बयान के हवाले से गुरनानी का दावा है कि भारत के पास डेटा की कमी नहीं है, बस अगर इसका इस्तेमाल देश के काम आने वाले एआई टूल्स बनाने में करना होगा। इस डेटा एआई रेस में भारत के लिए सबसे बड़े फायदे के संकेत देते हुए वह कहते हैं कि वर्तमान में चल रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस में भारत बाकी देशों को पीछे छोड़ सकता है।

गुरनानी ने इंडिया टुडे ब्रिक्स राउंडटेबल में एआई: द न्यू गेम चेंजर सेशन के में कहा कि एआई की रीढ़ डेटा और मशीन लर्निंग है। उन्होंने सवाल किया कि, ‘दुनिया की डेटा राजधानी कौन है?’ और जवाब में कहा, ‘भारत’। गुरनानी का कहना था कि भारत को सिर्फ AI मॉडल की टेक्नोलॉजी पर ध्यान देने के बजाय अपने डेटा के फायदे को ऐप्स के साथ जोड़ने पर ध्यान देना चाहिए।

आगे वह कहते हैं कि यदि मैं अपने डेटा और इस्तेमाल के तरीकों यानी यूज केसेस का सही तालमेल बिठा सकूं, चाहे उसे मैं विकसित करूं या कोई और, तो यह एक बड़ा फायदा होगा।

गुरनानी का कहना है कि एक किसान को टाइप करने की जरूरत नहीं है। वह अपनी मातृभाषा में फसल या जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार एआई एक ऐसा टूल बन गया है, जो दादी-नानी के लिए उतना ही जरूरी है, जितना कि किसी डेवलपर या गेमर के लिए।

गुरनानी ने एआई को बिजली की तरह देखने की बात कहते हुए बताया कि एआई अब सिर्फ डेवलपर्स या जानकारों तक सीमित टेक्नोलॉजी नहीं रही, बल्कि बातचीत वाले इंटरफेस और स्थानीय भाषाओं के जरिए आम यूज़र्स के लिए भी उपलब्ध हो रही है।

आगे उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर समझौता करना पड़ सकता है, लेकिन बाकी तीन चीजों जैसे यूजर इंटरफेस या एजेंटिक एआई इंटरफेस बनाने के मामले में हमें कोई समझौता करने की जरूरत है।

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