पानी से माइक्रोप्लास्टिक्स सहित कई अशुद्धियों को दूर करने का मैग्नेटिक हल- शोध

आरएमआईटी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक पानी को साफ करने की एक ऐसी टेक्नीक विकसित की है जो माइक्रो और नैनो प्लास्टिक सहित कुछ पीएफएएस को तेजी से हटा देती है।

इस यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में दी गई जानकारी के मुताबिक़, एक अवशोषक पदार्थ को दूषित जल के संपर्क में लाकर इसे एक चुंबक की मदद से अलग किया जा सकता है। माइक्रोप्लास्टिक्स हटाने का यह अविष्कार इस टीम की 2022 की सफलता पर आधारित है।

पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स की समस्या एक बढ़ती हुई वैश्विक चिंता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि व्यावहारिक परिस्थितियों में माइक्रो और नैनो-प्लास्टिक को हटाने की क्षमता इस काम को महत्वपूर्ण बनाती है।

एक्सपेरिमेंट के दौरान पीएफएएस यौगिकों के बड़े अणुओं को हटाने का भी पता चला है, जिसके बारे में शोधकर्ताओं का कहना है कि यह एक और आशाजनक प्रयोग हो सकता है, हालांकि वह हिस्सा प्रारंभिक चरण में है।

आरएमआईटी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के प्रमुख लेखक डॉक्टर मुहम्मद हारिस ने बताया कि हमारी तकनीक माइक्रो और नैनो‑प्लास्टिक को तेज़ी से हटाने के लिए डिज़ाइन की गई है। उनके अनुसार, इस प्रगति ने पानी को साफ करने में एक महत्वपूर्ण की बड़ी सफलता यह है कि अभी तक की तकनीक बड़े पैमाने पर नैनो-प्लास्टिक को हटाने में असमर्थ थी।

रिपोर्ट के मुताबिक़, लैब टेस्ट में इस विधि से एक घंटे के भीतर 95 प्रतिशत से अधिक सूक्ष्म और नैनो-प्लास्टिक को हटा दिया, जिसमें 30 नैनोमीटर तक छोटे कण भी शामिल थे। इस विधि के तहत पारा, क्रोमियम, तांबा, डाई और इबुप्रोफेन सहित 95 प्रतिशत से अधिक परीक्षण किए गए दूषित पदार्थों को भी हटा दिया। इसके पहले 15 मिनट में लगभग 80 प्रतिशत अशुद्धि हटाने में सफलता मिली।

टीम ने औद्योगिक कपड़े धोने के दूषित पानी में इस विधि का परीक्षण किया, जो सिंथेटिक फाइबर से माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। इसने रंगों के साथ-साथ 88 प्रतिशत से अधिक पॉलिएस्टर माइक्रोफाइबर को हटा दिया।

कनाडा में वन आई इंडस्ट्रीज की मैग्नेट से अपशिष्ट को अलग करने वाली तकनीक के साथ अवशोषक को संयोजित करने वाली एक प्रोटोटाइप प्रणाली से पता चला कि इस विधि को दोबारा उपयोग किया जा सकता है।

स्कूल ऑफ साइंस के सह-प्रमुख शोधकर्ता एसोसिएट प्रोफेसर नासिर महमूद बताते हैं कि मिलने वाले नतीजे व्यावहारिक उपयोग का समर्थन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह हमारे आस पास के पानी में काम करते हुए मिश्रित प्रदूषकों को दूर करता है और इसे दोबारा कुशलतापूर्वक प्रयोग किया जा सकता है।

वन आई इंडस्ट्रीज के संस्थापक और आविष्कारक रोजर सिमंसन ने कहा कि तरीके से लैब से नई जल उपचार इंडस्ट्री से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या का समाधान मिल सकेगा। उन्होंने कहा, “उद्योग माइक्रोप्लास्टिक्स और उभरते प्रदूषकों को प्रयोगशाला से बाहर निकालने और वास्तविक ट्रीटमेंट के माहौल में ले जाने के सरल तरीके की प्रतीक्षा कर रहा है।”

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