अतीत में पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी को भी ट्रोल किया गया था-ट्रोल करने वालों को रिया का जवाब

इन दिनों सबसे ज़्यादा वायरल फोटो की बात करें तो इनमे एक है मुंबई की उस निडर लड़की की जिसने पुलिस वैन के सामने खड़े होकर लोहा मनवाया। जंतर मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों के समर्थन में आने वाली रिया- एक्ट्रेस, मॉडल और एंटरप्रेन्योर हैं।

ईटीवी भारत को दिए एक इंटरव्यू में रिया ने अपना पक्ष सामने रखा। नीट पेपर लीक मामले को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने वाली रिया ने सबसे पहले पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।

सवालों का जवाब देते हुए रिया यादव ने कहा, ‘दिल्ली में जो हुआ वह बिल्कुल गलत था। बल्कि ‘गलत’ शब्द भी उस घटना की गंभीरता को बताने के लिए काफी नहीं है। पुलिस ने विरोध कर रहे छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण और अनुचित व्यवहार किया। उसी घटना के बाद मैंने इस संघर्ष में शामिल होने का फैसला किया। मुझे पूरा भरोसा है कि इस हरकत के लिए जिम्मेदार लोगों को भविष्य में निश्चित रूप से अपने किए का नतीजा भुगतना पड़ेगा।’

इंटरव्यू में रिया कहती हैं कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हमारे चुने हुए प्रतिनिधि हमारी तरफ से आवाज नहीं उठाते। उनका कहना है कि हमारी मांगें पूरी होनी चाहिए। यह मुद्दा सिर्फ नीट परीक्षा तक सीमित नहीं है। यह अब आम नागरिकों के घरों तक पहुंच गया है। जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को इस्तीफा देना होगा।

रिया ने ऑनलाइन ट्रोल करने वालों के बारे में बात करते हुए कहा, ‘कुछ लोग मेरे कामों के लिए मुझे ट्रोल कर रहे हैं, लेकिन मुझे पता है कि अतीत में पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी को भी ट्रोल किया गया था। इसके बावजूद, वे अपने विचारों पर अडिग रहे. जहां कुछ लोग मुझे ट्रोल कर रहे हैं, वहीं ज्यादातर लोग मेरे काम का सम्मान करते हैं। मेरे खिलाफ बोलने वाले ‘केकड़े जैसी सोच’ वाले लोगों से मैं बस इतना कहना चाहती हूं: आपको अंदाजा भी नहीं है कि मैंने असल में क्या किया है। ऐसी स्थितियों में, आलोचकों को नजरअंदाज करना ही सबसे अच्छा तरीका है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके उलट, मुझे खुशी है कि मुझे ट्रोल करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ इतने सारे लोग मेरा समर्थन कर रहे हैं। सावित्रीबाई फुले पर भी लोग पत्थर फेंकते थे। मैं अपनी तुलना सावित्रीबाई से नहीं कर रही हूं, लेकिन सच तो यह है कि सच बोलने वालों या आवाज उठाने वालों का विरोध करने वाले हमेशा कुछ लोग होते ही हैं। सबसे अच्छा तरीका यही है कि उन्हें नजरअंदाज़ किया जाए। जो लोग पत्रकारों के प्रति नकारात्मक सोच रखकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं, उनसे मैं बस इतना कहूंगी: हम पत्रकारों के खिलाफ नहीं हैं, हम यहां शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने आए हैं। इसलिए, हमें अपना विरोध शांति से करना चाहिए।’

रिया यादव ने कहा, ‘मेरा परिवार मजबूती से मेरे साथ खड़ा है। कई बार मुझे डर भी लगा कि मैंने क्या कर दिया है, लेकिन मेरे माता-पिता हमेशा मेरे साथ मजबूती से खड़े रहे। जब मेरा परिवार मेरे साथ है, तो मुझे कोई चिंता नहीं है। इसके अलावा, उस दिन मैं विरोध प्रदर्शन में खास तौर पर ‘वह’ काम करने के इरादे से नहीं गई थी। लेकिन जब मैंने अपने सामने अन्याय होते देखा, तो मैंने उसके खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया।’

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