इन जलवीरों ने करोड़ों लीटर बारिश का पानी बचाकर बदली जिले की तस्वीर

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में जल संरक्षण की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। वहां के लाखों ग्रामीणों ने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के नेतृत्व में करीब 3.41 लाख जल संरक्षण संरचनाएं तैयार कीं है। मात्र 15 दिनों में तैयार इन संरचनाओं में पहली ही बारिश में 31 करोड़ लीटर पानी जमा किया गया है।

यह देश का ऐसा इलाक़ा है जो गर्मियों में हर वर्ष पानी की कमी और लगातार गिरते भू-जल स्तर के कारण यहाँ के लोगों के जीवन को बेहद सख्त बना देता है। मगर इस बार जिले में कुछ ऐसा हुआ है कि पूरे देश के सामने एक उदाहरण बन गया है।

यहाँ के लाखों ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर मात्र पंद्रह दिनों में ऐसी जल संरक्षण संरचनाएं तैयार कर दीं, जिनमें पहली ही बारिश में 31 करोड़ लीटर पानी का संचय हो सका। दैनिक भास्कर खबर के मुताबिक़, पानी के इस बढ़ते संकट को देखते हुए कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार के नेतृत्व में “मोर गांव-मोर पानी 2.0” अभियान शुरू किया।

खबर के अनुसार, इस अभियान की अगुवाई कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार ने की। इन दोनों अधिकारियों ने सिर्फ योजनाएं नहीं बनाईं, बल्कि खुद मैदान में उतरकर लोगों को जोड़ा, छुट्टी के दिन भी काम किया और एक ऐसे जनआंदोलन का रूप दिया, जिसने पानी के संकट से जूझ रहे जिले में नई उम्मीद जगा दी।

बताते चलें कि छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला लंबे समय से पानी की समस्या का सामना कर रहा है। यहां लगातार खरीफ और रबी सीजन में धान की खेती होने के कारण भूमिगत जल का दोहन बढ़ता गया। गर्मियों के महीनों में हालत ऐसे होते कि कई गांवों में भू-जल स्तर 900 से 1000 फीट तक नीचे पहुंच जाता। कई इलाकों में बोरवेल सूख जाते थे और लोगों को पीने के पानी तक के लिए परेशानी उठानी पड़ती। ऐसे में जल संरक्षण की दिशा में बड़े और सामूहिक प्रयास की जरूरत महसूस की जा रही थी।

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