सुबह के वक़्त खाली पेट बिना दूध और चीनी वाली प्लेन कॉफी या ब्लैक कॉफी पीने से एंग्जायटी, घबराहट और मेंटल स्ट्रेस बढ़ता है। यह कहना है न्यूरोलॉजिस्ट का। इस पड़ताल के हवाले से मेडिकल एक्सपर्ट्स ने खास तौर पर उन लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है जिन्हें पहले से ही एंग्जायटी या डिप्रेशन की समस्या है।
न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, खाली पेट कैफीन तेज़ी से एब्जॉर्ब होता है और अचानक ब्रेन और नर्वस सिस्टम को एक्टिवेट कर देता है, जिससे दिल की धड़कन तेज़ हो सकती है, हाथ कांप सकते हैं और एंग्जायटी हो सकती है।
जर्नल ऑफ एजुकेशन, हेल्थ एंड स्पोर्ट में प्रकाशित शोध बताता है कि सुबह के समय ब्लैक कॉफी पीने से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है। सुबह के समय, खासकर जागने के 30 से 45 मिनट बाद, शरीर में स्वाभाविक सतर्कता और तनाव हार्मोन का स्तर पहले से ही अधिक होता है।
रिसर्च रिपोर्ट की माने तो इसके मुताबिक़, सुबह उठने के 30 से 45 मिनट बाद शरीर में स्ट्रेस हार्मोन नैचुरली हाई लेवल पर होता है। ऐसे समय में ब्लैक कॉफी पीने से शरीर का स्ट्रेस और बढ़ जाता है और एंग्जायटी के लक्षण तेज़ हो जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस पर प्रकाश डाला है। संगठन के अनुसार भारत में लगभग 3 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की चिंता से ग्रसित हैं । इसलिए, इस मानसिक स्वास्थ्य समस्या से निपटने के लिए सुबह-सुबह चिंता के कारणों की पहचान करना अत्यंत आवश्यक है।
एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि खाली पेट होने से शरीर में प्रोटीन, फैट और कॉम्प्लेक्स स्टार्च नहीं बन पाते जो कैफीन के एब्जॉर्प्शन को धीमा कर सकते हैं, नतीजतन, कैफीन तेज़ी से ब्रेन तक पहुंचता है और उन केमिकल्स को ब्लॉक कर देता है जो आपको रिलैक्स महसूस कराते हैं।
हालाँकि एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि कैफीन छोड़ने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन नाश्ते के बाद कॉफी पी जा सकती है। अगर आपको भूख नहीं भी लगती है, तो भी कॉफी से पहले हल्का खाना खाना फायदेमंद होता है ताकि कैफीन का असर संतुलित रहे और एंग्जायटी से बचा जा सके।