उत्तर प्रदेश की सभी पंचायतों को काम अब हाईटेक अंदाज़ में हो सकेंगे। दरअसल आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट्स ने खास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल की मदद यह प्रक्रिया पूरी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य गांवों में प्रशासनिक कामकाज, योजनाओं के क्रियान्वयन और रिकॉर्ड प्रबंधन को डिजिटल व पारदर्शी बनाना है।
ईटीवी भारत डॉटकॉम की एक खबर के मुताबिक़, इस बाबत कुछ समय पहले आईआईटी कानपुर व पंचायती राज विभाग के बीच करार हुआ था। करार के बाद अब इसे धरातल पर उतारने की तैयारी है।
इस संबंध में आईआईटी कानपुर में वरिष्ठ प्रोफेसर विमल कुमार का कहना है कि करार के बात उनकी टीम के सदस्यों द्वारा उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से 250 ऐसे लोगों को प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया। जिनका सीधा जुड़ाव पंचायती राज विभाग से था।
इनमें जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, पंचायत सचिव समेत और अफसर व कर्मचारी शामिल थे। आईआईटी कानपुर में आवासीय शिविर लगाकर इस सभी को लीडरशिप को इंप्रूव करने के लिए तकनीक की जानकारी दी गई।
इस बारे में प्रोफेसर विमल कुमार ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग से अब पंचायतों में बहुत अधिक सुधार दिखेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग से पंचायतों की दुनिया पूरी तरह बदल जाएगी। एआई में उन्हें दक्ष करने के अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, पंचायत सचिव समेत और अफसरों व कर्मचारियों के अंदर प्रबंधन की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए भी ट्रेनिंग दी गई है। साथ ही धरातल पर क्रियान्वित करने की भी जानकारी दी गई है।