लखनऊ में नाराज़ वकीलों ने की हड़ताल

लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों को तोड़ने के मामले में वकील संगठन एकजुट होते नज़र आए। प्रतिक्रिया के रूप में सेंट्रल बार के पदाधिकारियों द्वारा आज से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। इस बीच वकीलों के धरना-प्रदर्शन की भी खबर मिल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, लखनऊ में वकीलों ने सोमवार से बुधवार (18 से 20 मई) तक काम का बहिष्कार किया है। वकीलों ने बुलडोजर एक्शन पर विरोध जताते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। लखनऊ बार असोसिएशन के महामंत्री जीतू यादव ने सोमवार को आपात बैठक बुलाई है। पुलिस की लाठीचार्ज व प्रशासन की कार्रवाई को लेकर इस बैठक में प्रतिक्रिया की बात सामने आ सकती है।

रविवार सुबह हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम की ओर से अवैध चैंबर हटाने की कार्रवाई की गई थी। आदेश में हाईकोर्ट द्वारा निबंधन कार्यालय के आसपास नाले के ऊपर बने अवैध चैंबरों को हटाने की बात कही गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, नगर निगम टीम जब यहां कार्रवाई करने पहुंची तो वकीलों की तरफ से विरोध के बाद हालात बिगड़ गए।

पुलिस और वकीलों के बीच होने वाले इस प्रतिरोध में पथराव हुआ के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। मगर स्थिति बेकाबू होने पर नगर निगम और पुलिस को कार्रवाई रोकनी पड़ गई। इस बीच शेष चैंबरों को वकील खुद ही खाली कर कर रहे हैं।

सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से वकीलों पर लाठीचार्ज और एकतरफा कार्रवाई के विरोध में कार्य बहिष्कार का ऐलान किया गया है। एसोसिएशन के महामंत्री संजीव दीक्षित ने मीडिया को बताया कि पुलिस ने शांतिपूर्वक विरोध कर रहे वकीलों को पीटा है। आगे उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उन पर भी बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया है।

वकीलों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि इस कार्रवाई को लेकर जब तक दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक वह अपने काम पर नहीं लौटेंगे। इस संबंध में बुधवार को लखनऊ बार एसोसिएशन, अवध बार एसोसिएशन और सेंट्रल बार एसोसिएशन की संयुक्त बैठक होगी। बैठक में आगे की रणनीति पर संयुक्त रूप से फैसला लिया जाएगा।

बताते चलें कि 11 मार्च 2026 को अधिवक्ता अनुराधा सिंह व अन्य की ओर से दाखिल एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने नगर निगम को पुराने हाईकोर्ट के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया था।

नगर निगम ने इसके बाद अतिक्रमण चिन्हित किए और 7 अप्रैल को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुनः नगर निगम व पुलिस एवं प्रशासन पर अतिक्रमण हटाने के लिए सख्ती दिखाई। बताते चलें कि अदालत ने प्रशासन से अतिक्रमण हटाकर 25 मई तक रिपोर्ट मांगी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, नगर निगम की ओर से लाल रंग का क्रॉस का निशान लगाया गया था। करीब 40 से अधिक चैंबर को खाली किया गया है। इसमें कई घर और दुकानें भी शामिल हैं। खबर के अनुसार, कार्रवाई के डर के बीच वकीलों की तरफ से खुद ही अवैध चैंबर खाली किया जा रहा है।

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