कमल हासन ने फिल्म जगत को एक खुला पत्र लिखा है। उनका यह पत्र पश्चिम एशिया में तनाव के बीच बढ़ती उत्पादन लागत की चिंताओं से जुड़ा है।कमल हासन ने इस खुले पत्र को साझा करते हुए भारतीय फिल्म जगत से अनावश्यक खर्च कम करने, टिकाऊ फिल्म निर्माण पद्धतियों को अपनाने और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच बढ़ते आर्थिक दबावों के प्रभाव पर चर्चा करने का आग्रह किया है।
अभिनेता ने अपने संदेश में इस बात पर महत्व डाला कि भारतीय फिल्म उद्योग पहले से ही बढ़ते बजट और महामारी के बाद बाजार में असमान सुधार जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। और ऐसे में वह अपने विचार व्यक्त करते हुए लिखते हैं, ‘हर प्रेम कहानी केवल पेरिस में ही क्यों पनपनी चाहिए, हर हनीमून का अंत स्विट्जरलैंड में ही क्यों होना चाहिए?’
कमल हासन ने बीते दिन अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस सवाल को जगह दी कि कैसे वैश्विक स्थिति ईंधन की बढ़ती कीमतों, बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्चों और बढ़ती उत्पादन लागतों के माध्यम से भारत को प्रभावित करना शुरू कर रही है, साथ ही उन्होंने फिल्म निर्माण और सिनेमा अर्थशास्त्र के भविष्य पर सामूहिक रूप से चर्चा करने के लिए उद्योग के हितधारकों से आग्रह किया।
अभिनेता का मानना है कि यदि सिनेमा को आगे बढ़ना है, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि खर्च किया गया हर रुपया फिल्म के लिए ही हो, न कि केवल दिखावे के लिए। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय फिल्म उद्योग पहले से ही बढ़ते बजट और महामारी के बाद बाज़ार की असमान रिकवरी से जूझ रहा है। अपने विचार व्यक्त करते हुए वह लिखते हैं, ‘भारतीय फिल्म उद्योग के लिए यह ऐसे समय में आया है जब बजट पहले से ही बढ़ रहे हैं और बाज़ार की रिकवरी असमान बनी हुई है। बढ़ती लागतें केवल फिल्म निर्माण को ही प्रभावित नहीं करेंगी। मुद्रास्फीति के दबाव के कारण आने वाले महीनों में मनोरंजन पर उपभोक्ताओं के खर्च करने के तरीके में भी बदलाव आ सकता है। इसका बोझ अनिवार्य रूप से निर्माताओं, श्रमिकों, सिनेमाघरों, वितरकों, वित्तदाताओं और पूरे तंत्र पर पड़ेगा।
इस पत्र के ज़रिए कमल हासन ने अनावश्यक विलासितापूर्ण खर्चों को कम करने और खर्चीली निर्माण पद्धतियों पर पुनर्विचार करने का सुझाव दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिनेमा जगत में फाइनेंशियल सुधार कभी भी उन श्रमिकों और तकनीशियनों के हितों की कीमत पर नहीं होने चाहिए जो सिनेमा की रीढ़ हैं।