क्यूंकि जनगणना के आंकड़े सरकार को देश की वास्तविक स्थिति की जानकारी देते हैं इसलिए जनगणना में सभी को सम्मिलित होना चाहिए। दरअसल इन आंकड़ों के आधार पर जनहित में लाभकारी नीति बनाने में मदद मिलती है।
जनगणना 2027 यानी 16वीं भारतीय जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस प्रक्रिया के पहले चरण में मकानसूचीकरण का काम पहली अप्रैल से शुरू हो चुका है। यह पहली डिजिटल जनगणना है जिसमें मकानों की गणना और 2027 में मुख्य जनसंख्या गणना होगी।
जनगणना में शामिल नहीं होने की दशा में सेंसस एक्ट-1948 के सेक्शन-11 के तहत एक हज़ार रुपये का जुरमाना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान भी है। ऐसे में सरकार लोगों से लगातार जनगणना में शामिल होने की अपील कर रही है। इसके बाद भी यदि कोई नागरिक घर आए जनगणनाकर्मी को जनगणना में शामिल होने से इंकार करता है तो उसे जुर्माने के साथ तीन साल तक की सजा हो सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, 15 मई तक ऑनलाइन सेल्फ एन्यूमरेशन (स्व-गणना) चल रही है। फिर 16 मई से घर-घर जाकर जनगणना का काम शुरू होगा। जनगणना में शामिल होने से इनकार करने वाले को समझाने का प्रयास किया जाएगा और बार-बार समझाने के बाद भी वह जनगणना में शामिल नहीं होता है तो सेंसस एक्ट-1948 के सेक्शन-11 के तहत उस पर एक हज़ार रुपए के जुरमाना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान भी है।
जनगणनाकर्मी का सत्यापन करने के लिए आप क्यूआर कोड से मदद ले सकते हैं। जब जनगणनाकर्मी 16 मई से आप के घर आएं तो आपको उनके पास एक आईडी कार्ड मिलेगा। उसमें एक क्यूआर कोड होगा। जिसे स्कैन करके आप उसका सत्यापन कर सकते हैं।
अनुमान के मुताबिक़, यह पूरी प्रक्रिया करीब 20 मिनट की होगी। आपके घर आने वाले जनगणनाकर्मी पहला सवाल पूछेंगे कि आप ने सेल्फ एन्यूमरेशन कराया है?यदि आपने कराया है तो आपको सेल्फ एन्यूमरेशन के समय मिला आईडी नंबर बताना होगा। नहीं कराने की दशा में सभी 33 सवालों के जवाब देने होंगे।
ध्यान रहे कि जनगणना में पूछे गए सवालों की सही जानकारी देनी चाहिए। जनगणना के दौरान प्राप्त किए गए आंकड़ों को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है। सरकार व्यक्तिगत आंकड़ों को कभी भी सार्वजनिक नहीं करती है।