लखनऊ विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज लखनऊ की ओर से शैक्षणिक सत्र 2026-27 से में एमबीए इन फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट का पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम की घोषणा कुलपति ने बुधवार को की।
फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम लिए कुल 60 सीटें निर्धारित की गई हैं। चार सेमेस्टर में संचालित होने वाला यह पाठ्यक्रम सीबीसीएस यानि चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर आधारित होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, कुलपति प्रोफ़ेसर जय प्रकाश सैनी ने जानकारी दी है कि इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थियों के पास बीफार्मा, बीटेक केमिकल इंजीनियरिंग, बायोटेक्नोलॉजी, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, बीएससी (केमिस्ट्री) या फिर एमएससी की डिग्री होना ज़रूरी है।
प्रवेश प्रक्रिया पीजीईटी-एलयू परीक्षा के माध्यम से होगी, जिसके आवेदन पत्र विवि की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। प्रवेश के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अंक 45 प्रतिशत हैं। प्रवेश परीक्षा जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट पर आधारित होगी।
कुलपति सैनी का कहना है कि फार्मेसी क्षेत्र में बढ़ते रोजगार अवसरों को देखते हुए एमबीए इन फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट पाठ्यक्रम युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। उनका यह भी कहना है कि उत्तर प्रदेश में यह अपनी तरह का पहला रोजगारोन्मुखी एमबीए फार्मा मैनेजमेंट पाठ्यक्रम है।
इस पाठ्यक्रम में फार्मास्यूटिकल इंटरनेशनल बिजनेस, फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट डेवलपमेंट, फार्मास्यूटिकल ब्रांड मैनेजमेंट तथा बायोमेडिकल डिवाइसेज जैसे महत्वपूर्ण रोजगार परक विषयों को शामिल किया गया है।
इस पाठ्यक्रम को डिज़ायन करने के लिए भारतीय प्रबंधन संस्थानों आईआईएम सहित औषधि उद्योग, सीएसआईआर-सीआईएमएपी, सीएसआईआर-सीडीआरआई के शिक्षाविदों और वैज्ञानिकों से सहयोग लिया गया है।