चित्रकूट स्थित रानीपुर टाइगर रिजर्व से पर्यावरण संरक्षण संबंधी एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। ईटीवी भारत डॉट कॉम की एक खबर के मुताबिक़, रानीपुर टाइगर रिजर्व मानिकपुर वन विभाग के सकरौहां बीट क्षेत्र में 12 से अधिक संरक्षित गिद्धों का एक साथ दिखाई देने को वन विभाग के प्रयासों की सफलता माना जा रहा है।

खबर के अनुसार, इसे प्रकृति के पुनर्जीवन का सकारात्मक संकेत भी माना जा रहा है। सालों पहले विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके गिद्धों की धीरे-धीरे वापसी अब पारिस्थितिक संतुलन के मजबूत होने का प्रमाण बन रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि, प्रभागी वनाधिकारी प्रत्यूष कटियार के अनुसार, गिद्ध प्रकृति के “सफाईकर्मी” माने जाते हैं, जो मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण को संक्रमण और बीमारियों से बचाते हैं। एक समय ऐसा था जब क्षेत्र में गिद्धों की संख्या तेजी से घटकर संकटपूर्ण स्तर पर पहुंच गई थी। इसका मुख्य कारण पशुओं के उपचार में उपयोग होने वाली दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनाक थी, जो गिद्धों के गुर्दों के लिए घातक साबित हुई। साल 2006 में इस दवा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिली।
2010–11 के दौरान तीन मौसमों में गणना और गुणवत्ता मूल्यांकन किया गया। ताकि उत्तर प्रदेश में गिद्धों की समृद्धि और संख्या का आकलन किया जा सके। भारत में पाए जाने वाली गिद्धों की 9 प्रजातियों में से उत्तर प्रदेश में 6 प्रजातियां पाई जाती हैं।
केंद्र सरकार द्वारा संचालित गिद्ध संरक्षण कार्य योजना (2020–2025) के अंतर्गत देशभर में सुरक्षित आवास, भोजन, क्षेत्र और प्रजनन केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर स्थापित वल्चर कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर, गिद्धों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं, अब मेलॉक्सिकैम जैसी सुरक्षित दवाओं के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि गिद्धों को नुकसान न पहुंचे।
रानीपुर टाइगर रिजर्व बना गिद्धों के लिए हॉटस्पॉट: रानीपुर टाइगर रिजर्व गिद्धों के लिए हॉटस्पॉट है जिसे “वल्चर सेफ जोन” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गिद्धों के लिए सुरक्षित भोजन और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेषज्ञ टीमों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग, ब्रीडिंग साइट्स की सुरक्षा और जनजागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। इससे गिद्धों की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है। मानिकपुर के अलावा रानीपुर टाइगर रिजर्व के रैपुरा क्षेत्र में भी गिद्ध देखे गए हैं।
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि पशुओं के उपचार में प्रतिबंधित दवाओं का उपयोग न करें और वन्यजीव संरक्षण में सहयोग दें। रानीपुर टाइगर रिजर्व में गिद्धों की बढ़ती मौजूदगी यह संदेश देती है कि यदि सामूहिक प्रयास ईमानदारी से किए जाएं, तो प्रकृति स्वयं को पुनर्जीवित करने की क्षमता रखती है। यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण की मजबूत नींव साबित होगी।
गिद्धों की एक बड़ी संख्या देख उत्साहित गांव के ग्रामीण ने बताया कि वातावरण को साफ और स्वक्ष रखने में गिद्धों की बहुत बड़ी भूमिका होती है, इन गिद्धों को उन्होंने एक दशक बाद इस क्षेत्र में देखा है, आशा है वह विभाग के प्रयास से आगे आने वाली पीढ़ी इन्हें देख पाएगी।












