लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में फेफड़ों के गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। इसके लिए एडवांस एडवांस लंग ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित किए जाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।

केजीएमयू में लंग ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थाप्न को लेकर कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने बताया कि पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग प्रदेश में ही विश्वस्तरीय उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में अग्रसर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, यह घोषणा इंडियन चेस्ट सोसाइटी और पल्मोक्रिट फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित एडवांस्ड इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सम्मेलन में की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि चिकित्सा में सब-स्पेशियलिटी सेवाओं के विकास से मरीजों को पहले की अपेक्षा अधिक बेहतर उपचार मिल सकेगा।
विशेषज्ञों ने सम्मेलन के माध्यम से फेफड़ों के कैंसर की समस्या एवं इसके बचाव के साथ श्वसन संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक रहने पर जोर दिया। जानकारों के मुताबिक़, कैंसर ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की सामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और समय पर उपचार न मिलने पर अन्य अंगों तक फैल सकती हैं।
याद दिला दें कि लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में दिल और फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा को लेकर काफी दिनों से प्रयास जारी था। कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद द्वारा सभी तैयारियां पूरी होने की जानकारी पहले भी दी चुकी है। इसके लिए ब्रेनडेड व्यक्तियों के अंगदान के बाद काम की शुरुआत होगी। कुलपति द्वारा साझा जानकारी में कहा गया था कि संस्थान के शताब्दी भवन में विशेष ट्रांसप्लांट यूनिट की स्थापना की गई है। यहां अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी सभी सुविधाएं मौजूद हैं।
गौरतलब है कि अभी तक यहां कार्निया के साथ ही लिवर और किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा उपलब्ध थी। अब फेफड़ा और दिल प्रत्यारोपण की सुविधा भी शुरू की जाएगी।
विशेषज्ञों ने एडवांस्ड इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी सम्मेलन में चिकित्सा में सबस्पेशियलिटी सेवाओं के महत्व पर जोर दिया और कैंसर के प्रति भी सचेत करते हुए बताया कि इसकी अनियंत्रित वृद्धि ट्यूमर का कारण बन सकती है।
इन बीमारियों के उपचार के लिए समय पर जांच, विशेषज्ञ परामर्श और उन्नत उपचार की बदौलत जीवन बचा सकते हैं। जागरूक रहकर फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां जैसे फाइब्रोसिस, एंड-स्टेज लंग डिजीज या लंग कैंसर की रोकथाम संभव है। इसके अलावा स्वस्थ शरीर के लिए धूम्रपान से दूरी, प्रदूषण से बचाव और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी बातों पर भी ज़ोर दिया गया।











