लखनऊ विकास प्राधिकरण अब गोमती नगर विस्तार में पुलिस मुख्यालय के समीप आवासीय अपार्टमेंट बनाएगा। इसके लिए जिस भूमि पर काम किया जाएगा वह 43 एकड़ जमीन अवैध कब्जे से खाली कराई गई है। प्राधिकरण ने छह निजी बिल्डरों की सात टाउनशिप के डीपीआर को भी पास किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव ने जानकारी दी है कि गोमती नगर विस्तार में पुलिस मुख्यालय के पास खाली कराई गई जमीन पर 11 ग्रुप हाउसिंग के भूखंड बनाए गए हैं। इन पर फ्लैट का निर्माण होगा। इसके लिए यूपी टाउनशिप नीति 2023 के तहत सात निजी बिल्डरों की टाउनशिप डीपीआर भी पास हो गई है।
जिन निजी बिल्डरों की डीपीआर पास हुई है उनमें दुर्गा ग्रींस इंफ्राटेक, बाबा इंफ्रा डेवलपर्स, अविचल इंफ्रा बिल्ड, एसमैप बिल्डर्स एंड डेवलपर्स (दो डीपीआर), ओमेक्स लिमिटेड व नीलेंद्राज कंस्ट्रक्शन शामिल हैं। इनमें से अधिकतर टाउनशिप का निर्माण मोहनलालगंज में किया जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नीति के तहत इनके पास कुल योजना की 60 प्रतिशत जमीन है। निजी बिल्डर एडमायर इंफ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (मिग्सन ग्रुप) हसनपुर खेवली गांव में आवासीय योजना विकसित कर रही है। इसमें सरकारी जमीन भी शामिल है। गौरतलब है कि इस जमीन का पुनर्ग्रहण किए जाने का प्रस्ताव प्राधिकरण में आया था, जिसे शासन को भेजने का निर्णय लिया गया है।
हाईटेक टाउनशिप परियोजना के तहत ऐसी ही प्रयासों में अंसल गोल्फ सिटी भी शामिल है। यहाँ के लिए ग्रामीण आबादी की जमीन पर मानचित्र पास करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। अनुमति प्राप्त होने के बाद मानचित्र पास किए जाएंगे और आगे का काम होगा।
एलडीए अपनी विभिन्न आवासीय योजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के प्लॉटों पर काबिज अवैध कब्जेदारों को वैध करेगा। इसके लिए कब्जेदारों से मौजूदा कीमत वसूल की जाएगी। इसका प्रस्ताव बोर्ड ने शुक्रवार को पास किया। उधर बोर्ड ने उन आवंटियों को भी राहत दी है कि जिन्होंने एलडीए की महंगी व्यावसायिक संपत्तियां खरीदी हैं मगर पूरा पैसा जमा न होने से आवंटन निरस्त हो गया है। अब उनका आवंटन बहाल किया जाएगा।
योजना को साकार करने के लिए प्राधिकरण द्वारा व्यावसायिक संपत्तियों के पुनर्जीवन पर लगी रोक भी हटा दी है। ऐसे में अब आवंटी बकाया पैसा ब्याज के साथ जमा कर निरस्त आवंटन बहाल करा सकेंगे। गौरतलब है कि बोर्ड ने आवंटन बहाल करने का प्रस्ताव पास किया है।बताते चलें कि कई आवंटी ऐसे हैं जिन्होंने 30 करोड़ तक जमा कर दिए हैं, मगर पूरा पैसा जमा न करने पर आवंटन निरस्त हो गया। यह लोग ब्याज के साथ बकाया पैसा जमा करने को तैयार हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने जानकारी दी है कि कानपुर रोड, मानसरोवर योजना, शारदा नगर, जानकीपुरम, जानकीपुरम विस्तार, सीतापुर रोड, गोमती नगर आदि योजनाओं में साइड एंड सर्विस श्रेणी के ईडब्ल्यूएस प्लॉटों पर ऐसे लोग काबिज हैं जिनका आवंटन नहीं है, मगर उन्होंने मूल आवंटियों से नियमों के विपरीत प्लॉट खरीद लिए थे।
यहाँ जिन लोगों ने अधिग्रहण किया है, उन्होंने निर्माण भी कर लिया है। पिछले एक वर्ष में करीब सौ ऐसे मामले आए हैं। इसे देखते हुए बोर्ड ने तय किया है कि जो लोग प्लॉट पर काबिज हैं उनसे एलडीए मौजूदा कीमत लेकर जमीन की रजिस्ट्री कर देगा।















