भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपना सबसे भारी संचार उपग्रह कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया है। यह उपग्रह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप और आसपास के महासागरों को कवर करेगा।

इस संचार उपग्रह का वज़न लगभग 4,410 किलोग्राम है और इसे दक्षिणी आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया। रविवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-7आर (सीएमएस-03) के सफलतापूर्वक लॉन्च पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो को इस सफलता पर बधाई दी।
यह सैटेलाइट नेवी का अब तक का सबसे एडवांस कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म है, जो इसकी अंतरिक्ष-आधारित संचार प्रणाली और समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को अधिक दक्षता प्रदान करेगा। रॉकेट लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में करीब 8,000 किलोग्राम और जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (करीब 36,000 किमी ऊंचाई) में 4,000 किलोग्राम तक का भार ले जा सकता है।
भारत की अंतरिक्ष संचार क्षमताओं को यह मिशन नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। रॉकेट ने पहले अपने दोनों S200 सॉलिड बूस्टर और पेलोड फेयरिंग को सफलतापूर्वक अलग किया। उसके बाद यह L110 लिक्विड कोर स्टेज में पहुंच गया था। अंतिम अपडेट के अनुसार, L110 चरण बंद (shutoff) होते ही रॉकेट ने अपने अंतिम और सबसे उन्नत चरण, C25 क्रायोजेनिक स्टेज में प्रवेश कर लिया है।
भारत की दूरसंचार क्षमता को CMS-03 सैटेलाइट नई ऊंचाई देगा। यह उपग्रह देश के संचार नेटवर्क को और मज़बूत करेगा और सुदूर इलाकों तक इंटरनेट और प्रसारण सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।















