गुरुवार को संसद में विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी में बताया गया कि पिछले पांच सालों में करीब 9 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि सरकार भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों का सालवार रिकॉर्ड रखती है।

पिछले वर्षों में विदेशी नागरिकता लेने का यह ट्रेंड लगातार बढ़ा है। ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, पिछले पांच सालों में नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
जानकारी में बताया गया है कि साल 2020 में 85,256 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी। 2021 में 163,370; 2022 में 225,620; 2023 में 216,219; और 2024 में 206,378। इसके अलावा, 2011 और 2019 के बीच 1,189,194 भारतीयों ने अपनी नागरिकता का त्याग किया।
पेश किए गए आंकड़ों पर नज़र डालें तो इस अवधि के दौरान, 2011 में 1,22,819 लोगों ने नागरिकता का त्याग किया; 2012 में 1,20,923; 2013 में 1,31,405; 2014 में 1,29,328; 2015 में 1,31,489; 2016 में 1,41,603; 2017 में 1,33,049; 2018 में 1,34,561 और 2019 में 1,44,017 शिकायतें मिलीं।
इस दौरान साल 2024-25 में विदेश में रहने वाले भारतीयों से मिली शिकायतों के बारे में एक और सवाल के जवाब में, विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि विदेश मंत्रालय को कुल 16,127 शिकायतें मिलीं। इनमें से 11,195 शिकायतें ‘MADAD’ पोर्टल के ज़रिए और 4,932 शिकायतें CPGRAMS के ज़रिए दर्ज की गईं।
शिकायतों से जुड़े सबसे ज़्यादा परेशानी के मामले सऊदी अरब (3,049) से आए, इसके बाद यूएई (1,587), मलेशिया (662), US (620), ओमान (613), कुवैत (549), कनाडा (345), ऑस्ट्रेलिया (318), UK (299), और कतर (289) का नंबर आता है।
प्रवासी भारतीयों की शिकायतों को दूर करने के हवाले से मंत्री का कहना है कि भारत ने इस समस्या का सामना करने के लिए एक “मज़बूत और कई लेयर वाला सिस्टम” बनाया है, जिसमें इमरजेंसी हेल्पलाइन, वॉक-इन क्लीनिक, सोशल मीडिया और 24×7 मल्टीलिंगुअल सपोर्ट शामिल हैं। बताते चलें कि ज़्यादातर मामले सीधे संपर्क, एम्प्लॉयर के साथ मीडिएशन और विदेशी अधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेशन के ज़रिए तेज़ी से सुलझाए जाते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय दूतावास पैनल वकीलों के ज़रिए कानूनी मदद भी देते हैं, जिसे इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड से सपोर्ट मिलता है। वहीँ कुछ मामलों में देरी की वजह अधूरी जानकारी, एम्प्लॉयर से सहयोग की कमी और कानूनी मामलों में भारतीय मिशन की सीमित भूमिका बताई गई। साथ ही उन्होंने इस बात को भी स्पष्ट किया कि प्रवासी मज़दूरों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र और कॉन्सुलर कैंप लगातार गाइडेंस और सपोर्ट देते हैं।















