शीत सत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के कोषाध्यक्ष अजय माकन ने संसद में जो जानकारी साझा की उसके अनुसार, त्तारूढ़ बीजेपी के पास इस समय 10,107 करोड़ का भारी-भरकम बैंक बैलेंस है।

अजय माकन द्वारसझा जानकारी से पता चलता है कि बीजेपी ने पिछले दो सालों में राजनीतिक चंदे का सबसे बड़ा हिस्सा हासिल किया है, जिससे उसके पास एक बहुत बड़ा फंड है। उन्होंने यह बात भी सामने रखी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक बताकर रद्द करने के बाद भी भाजपा को लगातार भारी-भरकम रकम मिलती रही है।
शुक्रवार को चुनाव आयोग की ओर से जारी किए गए नए डेटा के अनुसार, भाजपा को 2024-25 में राजनीतिक चंदे के तौर पर 6,000 करोड़ रुपए से ज़्यादा मिले, जो 2023-24 के लगभग 4,000 करोड़ रुपए से काफी ज़्यादा है। वहीँ मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को इस दौरान महज़ ₹522 करोड़ मिले, जो बीजेपी को मिले चंदे के बारहवें हिस्से से भी कम है।
भाजपा को मिला चंदा सभी विपक्षी पार्टियों को मिले चंदे से कही ज़्यादा है। उन्होंने इसे राजनीतिक दलों के बीच समान प्रतिस्पर्धा की बुनियाद पर सवाल कहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भाजपा को 6,654.93 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड चंदा मिला, जो पिछले साल से 68% ज्यादा है। इसमें 40% हिस्सा इलेक्टोरल ट्रस्ट्स से आया और बड़े कॉरपोरेट दानदाताओं ने योगदान दिया।
अजय माकन ने इसे देश के चुनावी लोकतंत्र में एक बेहद चिंताजनक रुख बताते हुए तर्क दिया था कि इस तरह की भारी वित्तीय असमानता लोकतांत्रिक मुकाबले की बुनियाद पर ही चोट करती है, जो राजनीतिक पार्टियों के बीच समान अवसर पर आधारित है।
याद दिला दें कि यह मामला चर्चा में उस समय आया जब 2018 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को मोदी सरकार ने राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने के एक तरीके के तौर पर पेश किया था।
भाजपा द्वारा दाखिल हिसाब-किताब के आधार पर चुनाव आयोग की तरफ से जो आंकड़ा जारी किया है, उसमें 20,000 रुपए से ज़्यादा के चंदे की डिटेल दी गई है। कांग्रेस और दूसरे छह राजनीतिक दलों और इलेक्टोरल ट्रस्ट के ऐसे ही खुलासे पिछले महीने सार्वजनिक किए गए थे।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले के साल में कुल राजनीतिक चंदे में बीजेपी का हिस्सा 56 फीसदी था, जो 2024-25 में बढ़कर 85 फीसदी हो गया है। चंदा देने वालों की सूची में सबसे ऊपर प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट है। इस ट्रस्ट की तरफ से भाजपा को 2,181 करोड़ रुपए जबकि कांग्रेस को 216 करोड़ रुपए दिए हैं। इस ट्रस्ट का सबसे बड़ा दानकर्ता एलएंडटी (लार्सन एंड टूब्रो) से जुड़ी एलिवेटेड एवेन्यू रियल्टी एलएलपी है, जिसने अकेले 500 करोड़ रुपए का योगदान दिया है।
दूसरा प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट टाटा समूह द्वारा नियंत्रित है, यहाँ से भाजपा को 757.6 करोड़ रुपए और कांग्रेस को 77.3 करोड़ रुपए दान किए हैं। इस ने सरकार की तरफ से मिलने वाली भारी सब्सिडी वाले सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स हासिल करने के कुछ हफ़्ते बाद बीजेपी को भारी चंदा दिया था। इस तरह टाटा समूह सत्ताधारी पार्टी को चंदा देने वाला सबसे बड़ा कॉर्पोरेट डोनर है।
तीसरे बड़े सहयोग की बात करें तो यह डोनर एबी जनरल ट्रस्ट है जिसने भाजपा को 606 करोड़ रुपए और कांग्रेस को मात्र 15 करोड़ रुपए दान किए। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक इस ट्रस्ट के दानकर्ताओं का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह ट्रस्ट पारंपरिक रूप से आदित्य बिड़ला ग्रुप से जुड़ा हुआ है।
विपक्षी नेताओं सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने इस सहयोग पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह लोग इसे पॉलिटिकल फंडिंग में संस्थागत असंतुलन के तौर पर देख रहे हैं।















