नशीली दवाओं के दुरुपयोग से मुक्त दुनिया बनाने के लिए हर साल 26 जून को इन दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस या विश्व नशीली दवा दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष का विश्व नशीली दवा दिवस न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और वैकल्पिक आजीविका सहित रोकथाम में निवेश का आह्वान करता है।

इस वर्ष का अभियान “चक्र तोड़ो। #संगठित अपराध रोको” इससे जुड़े अपराध और तस्करी के चक्र को तोड़ने के लिए एकजुटता के साथ कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देता है। साथ ही यह मूल कारणों को संबोधित करने के साथ रोकथाम में निवेश करके और मजबूत स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक प्रणालियों का निर्माण की बात करता है।
भारत में इस अवसर पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग एक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। आज होने वाले इस कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी एल वर्मा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। इसका आयोजन नई दिल्ली के डॉ अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में किया गया है।
नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय 7 दिसम्बर 1987 को लिया गया था। इस दिन महासभा ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग से मुक्त अंतर्राष्ट्रीय समाज के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्रवाई और सहयोग को मजबूत करने के अपने दृढ़ संकल्प की अभिव्यक्ति के रूप में आज के दिन का चुनाव किया।
अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य निषेध एवं तस्करी रोकथाम दिवस पर हर वर्ष देश भर में नशीली दवाओं की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के अंतर्गत विभाग ने सभी समर्थित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा इसकी रोकथाम के लिए प्रयास किए जाते हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी गैर सरकारी संगठनों/स्वैच्छिक संगठनों से पहली जून से 26 जून, 2025 तक एनएमबीए के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम/कार्यक्रमों का आयोजन और संचालन किया गया। इन कार्यक्रम के माध्यम से विभाग पूरे देश में जन आंदोलन के रूप में नशा मुक्त भारत अभियान तक पहुंच सुनिश्चित करेगा।
जमीनी स्तर पर अब तक की गई विभिन्न गतिविधियों से 15.78 करोड़ से अधिक लोगों को मादक द्रव्यों के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया है। इनमे में 5.26 करोड़ से अधिक युवा और 3.31 करोड़ से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
इस अभियान का संदेश देश के बच्चों और युवाओं तक पहुँचाने के लिए 4.31 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी का योगदान शामिल है। करीब 20 हज़ार से अधिक मास्टर वालंटियर्स की एक टीम की पहचान की गई है और उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। बताते चलें कि राष्ट्रीय ऑनलाइन प्रतिज्ञा में 99,595 शैक्षणिक संस्थानों के 1.67 करोड़ से अधिक छात्रों ने नशामुक्ति की शपथ ली।
इसके अलावा सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अभियान के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। एनएमबीए मोबाइल एप्लीकेशन एनएमबीए की गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों को इकट्ठा करने और जिलों और मास्टर वालंटियर्स द्वारा वास्तविक समय के आधार पर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एनएमबीए डैशबोर्ड पर प्रस्तुत करने के लिए विकसित किया गया है। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए http://nmba.dosje.gov.in की वेबसाइट से विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
मादक पदार्थों के सेवन से होने वाला विकार एक समस्या है जो देश के सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इन मादक पदार्थों से मनोवैज्ञानिक विकार, हृदय संबंधी रोग, साथ ही दुर्घटनाएं, आत्महत्या और हिंसा का कारण बन सकते हैं। इसलिए, मादक द्रव्यों के सेवन और निर्भरता को एक मनो-सामाजिक-चिकित्सा समस्या के रूप में देखा जाना चाहिए।













