वैज्ञानिकों का मानना है कि फ्री-लिविंग अमीबा का खतरा बढ़ रहा है। इसके कारणों पर प्रकाश डालते हुए उनका कहना है कि बढ़ते तापमान के अलावा पुरानी जल आपूर्ति व्यवस्था और कमजोर निगरानी प्रणाली इसके फैलाव को तेज कर रहे हैं। नज़र न आने वाला यह खतरा वैश्विक स्वास्थ्य पर गंभीर समस्या बन सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से यह खतरा और बढ़ा रहा है। ये अमीबा गर्म पानी में और भी तेजी से बढ़ते हैं, जिससे नए क्षेत्रों में भी इनका फैलाव बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों ने मुक्त-जीवी अमीबा (फ्री-लिविंग अमीबा) को अब वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बढ़ता खतरा बताते हुए इस पर चेतावनी दी है। जानकारी के अनुसार ये सूक्ष्म जीव मिट्टी, ताजे पानी और कई बार मानव निर्मित जल प्रणालियों में पाए जाते हैं। हालाँकि ज़्यादातर अमीबा हानिरहित होते हैं, मगर कुछ प्रजातियां गंभीर और जानलेवा संक्रमण पैदा कर सकती हैं।
नुकसान पहुँचाने वाले अमीबा की बात करें तो नेगलेरिया फाउलेरी इस प्रकार में आता है। इसे आम तौर पर “दिमाग खाने वाला अमीबा” कहा जाता है। यह दूषित पानी द्वारा नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और सीधे मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। इससे होने वाला संक्रमण जानलेवा हो सकता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक़ इनकी सबसे चिंताजनक खूबी इनका बेहद कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रह जाना है। अपनी विशेषता के चलते इनमे अधिक तापमान सहित क्लोरीन जैसे रसायनों और पानी की आपूर्ति प्रणालियों में भी टिके रहने की क्षमता होती है। यही कारण है कि इनका खात्मा मुश्किल होता है।
ये अमीबा अन्य खतरनाक जीवाणुओं और वायरस को भी अपने अंदर सुरक्षित रखने की कला जानते हैं। इनके इस लक्षण के कारण इन्हे ‘ट्रोजन हॉर्स प्रभाव’ कहा जाता है, जिसमें हानिकारक सूक्ष्म जीव अमीबा के भीतर छिपकर बच जाते हैं और बाद में फैल सकते हैं। का संक्रमण और एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या भी बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों इनसे होल वाले खतरे को देखते हुए बेहतर निगरानी प्रणाली के साथ उन्नत जल शोधन तकनीक और स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा जल प्रबंधन के संयुक्त प्रयास को अपनाने की जरूरत पर ज़ोर देते हैं।