कई देशों की तरह भारत भी अब वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन सुरक्षा और एडिक्टिव प्लेटफॉर्म डिजाइन की बढ़ती चिंताओं के बीच बच्चों के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बड़े नीतिगत बदलावों पर विचार कर रहा है।
सोशल मीडिया की लत के चलते बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। जहाँ एक ओर यह बेसिक ज़रूरत बन चुका है वहीँ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के हवाले से इसके प्रभाव को देखते हुए सरकार बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने एक इंटरव्यू में कहा है कि सरकार विभिन्न पक्षों के साथ गंभीर चर्चा कर रही है ताकि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया तक पहुंच को सीमित या प्रतिबंधित करने के प्रस्तावों पर काम किया जा सके।
बताते चलें कि कई देशों की तरह भारत भी अब वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन सुरक्षा और एडिक्टिव प्लेटफॉर्म डिजाइन की बढ़ती चिंताओं के बीच बच्चों के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बड़े नीतिगत बदलावों पर विचार कर रहा है।
इसे पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बताते हुए आईटी सचिव का कहना है कि भारत इन वैश्विक घटनाक्रमों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। उनके मुताबिक़, यह देखे जाने की जरूरत है कि अन्य देशों ने सोशल मीडिया को लेकर क्या कदम उठाए हैं। देश में संसदीय स्थायी समितियों सहित विभिन्न मंचों पर इन खतरों पर विस्तार से चर्चा लगातार हो रही है। यूरोपीय संघ सहित कई अन्य देशों में भी सोशल मीडिया के जोखिमों का मुद्दा लगातार सामने आया है।
गौरतलब है कि इस समय बच्चों के सोशल मीडिया एक्सेस को लेकर कई देशों की सरकारें कड़े कानून बना रही हैं। अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने सोशल मीडिया संबंधी आयु प्रतिबंध से जुड़ा कानून पास किया है। कई यूरोपीय देश भी सख्त पैरेंटल कंसेंट यानी माता पिता की सहमति और एज वेरिफिकेशन सिस्टम को लागू करने की पैरवी कर रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने इस संबंध में जो जानकारी दी है उसके आधार पर अनुमान है कि सरकार इन सख्त नियमों को लागू करने की तैयारी में है-
उम्र का सत्यापन
अल्गोरिदम पर लगाम
पैरेंटल कंट्रोल
मौजूदा हालत को देखते हुए चल रही चर्चाओं में विभिन्न बिंदुओं को मुख्य रूप से केंद्रित किया जा रहा है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि कोई भी नया रेगुलेटरी ढांचा बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि युवा यूजर्स की सुरक्षा भी हो और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से मिलने वाले फायदों व रचनात्मकता को भी नुकसान न पहुंचे।