अब मेहनत की बदौलत बहाया गया पसीना भी बेकार नहीं जाएगा। जिस समय कोई अपना काम करते हुए पसीना बहाएगा, तब इसी पसीने से बिजली बनेगी। इस कमाल की रिसर्च को अंजाम दिया है जापान के वैज्ञानिकों ने।
सुनने में ज़रूर यह बात हैरान करने वाली लगती है कि इंसानों के पसीने से भी बिजली बन सकती है। लगे लेकिन यह आने वाले समय में यह सच्चाई सामने आएगी। जापान के वैज्ञानिक एक ऐसे ही प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इन वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान का शरीर खुद इनर्जी का एक ऐसा ज़रिया बन सकता है, जिससे भविष्य में पहनने वाले स्मार्ट गैजेट बिना बैटरी के चल सकें।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस के ये शोधकर्ता जिस तकनीक पर काम कर रहे हैं, उसमे इंसान के पसीने से बिजली बनाई जा सकती है। इस लोगों का कहना है कि आजकल स्मार्ट वॉच, हेल्थ ट्रैकर जैसे शरीर पर पहने जाने वाले डिवाइस में छोटे-छोटे सेंसर लगे होते हैं। इसे चलाने के लिए बैटरी की आवश्यकता होती है।
दरअसल बैटरी डिवाइस को वज़नी बना देती है और उसे बार-बार चार्ज भी करना पड़ता है। ऐसे में समस्या का हल निकालने के लिए वैज्ञानिकों ने एक बेहद पतला वियरेबल पैच बनाया है। इसे शरीर के साथ लगाया जाएगा और यह पैच सीधे इंसान के पसीने से बिजली बनाने का काम करेगा।
इस पैच में मौजूद एंजाइम आधारित बायोफ्यूल सेल पसीने के केमिकल कंपाउंड से लैक्टेट को लेकर बिजली बनता है। जैसे ही पसीना इस बायोफ्यूल सेल के संपर्क में आता है, पैच में मौजूद एंजाइम एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया (बायो-केमिकल प्रोसेस) शुरू कर देते हैं। इस प्रक्रिया में निकलने वाले इलेक्ट्रॉन बिजली पैदा करते हैं।
इस तकनीक को चलाने के लिए किसी बाहरी बिजली या चार्जिंग की जरूरत नहीं पड़ती। इसे यूं समझ सकते हैं कि किसी व्यक्ति द्वारा एक्सरसाइज या रोजमर्रा के काम के समय उसके शरीर से निकलने वाला पसीना इस पैच के लिए ऊर्जा का काम करेगा।
रिपोर्ट बताती है कि अगर यह तकनीक कामयाब होती है, तो भविष्य में ऐसे वियरेबल डिवाइस बन सकते हैं जिन्हें बार-बार चार्ज करने की जरूरत नहीं होगी।