आज का दिन यानी 2 अप्रैल विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा सभी 193 सदस्य देशों को सम्मिलित करते हुए सर्वसम्मति से वर्ल्ड ऑटिज़्म डे के लिए घोषित किया गया।
ऑटिज्म एक “डेवलपमेंटल डिसऑर्डर” है। इस में न्यूरॉन्स दिमाग़ के कुछ हिस्सों में ज़्यादा संपर्क में आ जाते हैं और कुछ में कम। 2007 में यू एन जनरल असेंबली ने दुनिया में इसके लिए जागरूकता फैलाने के लिए “इंक्लूजन” यानी समावेशन को बढ़ावा देने की खातिर 2 अप्रैल को यह नाम दिया।
इस दिन को मानाने का मक़सद है कि ऑटिज्म से पीड़ित लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके, ताकि वे समाज के अभिन्न अंग के रूप में पूर्ण और सार्थक जीवन जी सकें।
ऑटिस्टिक लोगों को राइट ऑफ पर्सन विद डिसएबिलिटी के तहत शिक्षा और नौकरी में बराबर का अधिकार मिला है। इन्हें सरकारी नौकरी में 4 प्रतिशत का आरक्षण भी मिला है।
ऑटिस्टिक लोगों के हवाले से हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इनमे कुछ विशेष प्रतिभाएं होती हैं। इन्हें पहचान कर उभारने के अवसर देने चाहिए। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने कहा कि कई वर्षों के व्यापक शोध से यह पता चला है कि खसरा, कण्ठमाला और रूबेला के टीके से ऑटिज्म नहीं होता है ।
इससे प्रभावित लोगों में बोलने के लिए शब्दों की कमी होती है और यह लोग लंबे वाक्य भी नहीं बना पाते हैं। ऑटिस्टिक लोगों में बहुत विविधता पाई जाती है। इनमे से कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हे हर समय देख रेख की ज़रूरत होती है। जबकि कुछ बिना मदद के अपने काम कर लेने में सक्षम होते हैं। इसको “ऑटिज्म स्पेक्ट्रम” कहते हैं।
ऑटिस्टिक लोगों की याददाश्त बहुत तेज़ होती है। किसी न किसी हुनर पर इन्हे महारत होती है। हमारे देश में RPWD act, 2016 लागू है। राइट ऑफ पर्सन विद डिसएबिलिटी के तहत इन लोगों को शिक्षा और नौकरी में बराबर का अधिकार मिला है। इसके अलावा इन्हें सरकारी नौकरी में 4 प्रतिशत का आरक्षण भी मिला है।
अनुमान के मुताबिक़, दुनिया भर में लगभग 100 में से एक बच्चा ऑटिज्म से पीड़ित है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य बताते हैं कि संभवतः ऐसे कई कारक हैं जो बच्चों में ऑटिज्म की संभावना को बढ़ाते हैं, जिनमें पर्यावरणीय और आनुवंशिक कारक शामिल हैं।
हालाँकि ऑटिज्म से पीड़ित लोग विश्व भर के समाजों में भारी योगदान दे रहे हैं, फिर भी उन्हें अभी भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर अपने संदेश में अधिक समान और समावेशी विश्व बनाने के लिए नए सिरे से प्रतिबद्धता का आह्वान किया है।
आज का दिन मनाने के समर्थक नीले कपड़े पहनकर ऑटिस्टिक लोगों के साथ अपना सहयोग दर्ज कराते हैं। इसके अलावा इन लोगों की बनाई किसी करती को भी साझा करते हैं।