उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 20 अहम प्रस्तावों को मंज़ूरी दे दी। सीनियर सिटिज़न के लिए राज्य की विकलांगता पेंशन योजना में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए कैबिनेट ने इसे “परिवार पहचान पत्र” प्रणाली से जोड़ने का फ़ैसला किया है।

अब वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए आवेदन करने में मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। यह जानकारी समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने संबंधित फ़ैसलों के हवाले से दी।
पेंशन का नया और आसान तरीका
नई प्रणाली का उद्देश्य पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाना और उन पात्र लाभार्थियों को शामिल करना है जो प्रक्रिया पूरी न कर पाने के कारण योजना से वंचित रह गए हैं। परिवार पहचान पत्र (एक परिवार, एक पहचान पत्र) प्रणाली स्वचालित रूप से उन नागरिकों की सूची तैयार करेगी जो अगले 90 दिनों में 60 वर्ष के हो जाएँगे।
बताते चलें कि समाज कल्याण विभाग पहले एसएमएस, व्हाट्सएप और फ़ोन कॉल जैसे डिजिटल माध्यमों से पात्र नागरिकों से सहमति लेगा। डिजिटल सहमति प्राप्त न होने पर ग्राम पंचायत सहायक या विभागीय कर्मचारी उनसे संपर्क करेंगे।
पेंशन डिजिटल हस्ताक्षरों के माध्यम से स्वीकृत की जाएगी और सहमति प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर आधार से जुड़े बैंक खातों में जमा कर दी जाएगी। लाभार्थी पासबुक जैसे मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने भुगतान पर नज़र रख सकेंगे। वर्तमान में लगभग 67.50 लाख वरिष्ठ नागरिक इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं।
प्रस्तावों को मंजूरी:
पेंशन के अलावा, कैबिनेट ने कई अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों को भी मंजूरी दी। राजस्व विभाग में लेखपाल के पद पर कानूनगो चपरासी (चेनमैन) की पदोन्नति हेतु “उत्तर प्रदेश लेखपाल सेवा नियमावली (पंचम संशोधन) 2025” को मंजूरी दी गई। इसके तहत विभाग में दो प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारियों को वाहन क्रय हेतु दिए जाने वाले सरकारी ऋण की राशि में वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में निजी सचिव ग्रेड-1 के 156 पदों को अपर निजी सचिव के पद पर पदोन्नत करने पर सहमति बनी, जिससे सरकार पर 10 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय भार आएगा।
इस अवसर पर मंत्रिमंडल ने महिला क्रिकेट टीम को विश्व कप जीतने पर बधाई दी तथा दिल्ली में हुई आतंकवादी घटना की भी निंदा की।















