पिछले तीन दशकों में सूखी हो गई दुनिया की तीन चौथाई जमीन

ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के बुरे प्रभाव का एक और उदहारण सामने आया है। सऊदी अरब के रियाद में लॉन्च की गई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नहीं रोका जाता है तो इस सदी के अंत तक दुनिया के 3 प्रतिशत नमी वाले इलाक़े, सूखी ज़मीन में बदल सकते हैं।पिछले तीन दशकों में सूखी हो गई दुनिया की तीन चौथाई जमीनयूएनसीसीडी का सोलहवां सम्मेलन रियाद में आयोजित किया गया। सम्मलेन में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह चिंताजनक खुलासा हुआ है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक़, पिछले तीन दशकों में दुनिया की तीन चौथाई यानी 77 प्रतिशत धरती शुष्क हो गई है और उसमें पानी की कमी है। चीन में भी बड़ा हिस्सा नमी वाली जमीन से शुष्क जमीन में बदल जाएगा। एशिया तथा अफ्रीका के देश भी इस समस्या से दो-चार होंगे।

जमीन के सूखने से जो इलाक़े इसकी चपेट में आएँगे और उनमें एशिया सहित यूरोप का 96 प्रतिशत इलाक़ा, पश्चिम अमरीका के कुछ इलाक़े, ब्राजील और मध्य अफ्रीका शामिल हैं।

यह रिपोर्ट यूएनसीसीडी यानी संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन में सोमवार को जारी की गई। रिपोर्ट के हवाले से, बीते 30 वर्षों में वैश्विक शुष्क भूमि का विस्तार लगभग 43 लाख वर्ग किलोमीटर हुआ है।

रिपोर्ट से यह खुलासा भी हुआ है कि पिछले तीन दशकों में शुष्क भूमि पर रहने वाले लोगों की संख्या दोगुनी होकर 2.3 अरब हो गई है।

हालात यदि ऐसे ही बने रहे तो साल 2100 तक शुष्क भूमि पर रहने वाले लोगों का आंकड़ा 5 अरब को पार कर सकता है। इससे मरुस्थलीकरण का विस्तार और जलवायु संबंधी शुष्कता में इज़ाफ़ा होगा और नतीजे में अरबों लोगों के जीवन और उनकी आजीविका पर खतरा पैदा हो जाएगा।

रिपोर्ट से पता चलता है कि जमीन के सूखने से जो इलाक़े इसकी चपेट में आएँगे और उनमें एशिया सहित यूरोप का 96 प्रतिशत इलाक़ा, पश्चिम अमरीका के कुछ इलाक़े, ब्राजील और मध्य अफ्रीका शामिल हैं। रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि दक्षिण सूडान और तंजानिया की भूमि का बड़ा हिस्सा भी शुष्क हो जाएगा।

दुनिया के बाक़ी हिस्सों में, जहाँ इसका असर देखने को मिलेगा उनमे भरता और पाकिस्तान के अलावा कैलिफोर्निया, इजिप्ट, चीन का पूर्वोत्तर इलाक़ा शुष्क हो जाएगा।

इसी क्रम में मध्य पश्चिमी संयुक्त राज्य अमरीका, उत्तरी वेनेजुएला, उत्तर पूर्वी ब्राजील, दक्षिण पूर्वी अर्जेंटीना, संपूर्ण भूमध्य सागरीय क्षेत्र और काला सागर तट, दक्षिण अफ्रीका का बड़ा हिस्सा और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया भी शुष्क भूमि की समस्या से बुरी तरह प्रभावित होंगे।

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