देशभर के लोग ज़ुबीन गर्ग की मौत का शोक मना रहे हैं। लोगों की इस मोहब्बत की सच्चाई का अंदाजा उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे लोगों की रिकॉर्ड संख्या से होता है। कहा जा रहा है कि इससे पहले इतनी ज्यादा भीड़ केवल एलिज़ाबेथ सेकेंड, पॉप फ्रांसिस और माइकल जैक्सन के लिए ही जुटी थी।

ज़ुबीन गर्ग के होम स्टेट असम में लोग सड़कों पर उतर आए। ये लोग लाखों की संख्या में थे। चाहने वालों की इस संख्या की बदौलत ये इतिहास का चौथा सबसे बड़ा फ्यूनरल बन गया। इसे लिम्का बुक और रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक़, 15 लाख से अधिक लोग इस फ्यूनरल में शामिल हुए। इससे ज़्यादा भीड़ केवल एलिज़ाबेथ सेकेंड, पॉप फ्रांसिस और माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा में जुटी थी।
बताते चलें कि ज़ुबीन असम के कल्चरल आइकन हैं। उनकी उम्र 52 थी। ज़ुबीन की 19 सितंबर को सिंगापुर में मौत हो गई थी। इस खबर को सुनने के बाद असम के अलग-अलग हिस्सों और खासकर गुवाहाटी के लोग सड़कों पर उतर आए। जनता का उन्हें पसंद किए जाने का अंदाजा उस समय हुआ जब 21 सितंबर को उनके अंतिम संस्कार में सड़कों पर लोगों का सैलाब देखा गया।
मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना का इम्पैक्ट बहुत बड़ा था। वहीँ लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी अंतिम यात्राओं में से एक माना है। यही नहीं ज़ुबीन की मौत दुनिया की चौथे सबसे बड़े फ्यूनरल के तौर पर देखि जा रही है।
ज़ुबीन की अंतिम यात्रा के वीडियोज़ इस समय इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहे हैं। अपने हीरो और पसंसीदा आइकॉन को अंतिम विदाई देने पहुंचे लोगों में बड़ी संख्या में ऐसे भी थे जो अपने साथ फूल और ग्रीटिंग कार्ड भी लेकर आए थे। इस बिदाई के दौरान गुवाहाटी की सड़कें जाम हो गईं। इस हुजूम में बच्चे, जवान और बूढ़े सभी शरीक थे।
नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में हिस्सा लेने गए ज़ुबीन सिंगापुर में थे, जब उनकी मौत हुई। वह 20 और 21 सितंबर को वो वहां परफॉर्म करने वाले थे। परफॉर्मेंस से पहले वह स्विमिंग करने चले गए। इस बीच उन्हें डाइविंग के दौरान सांस लेने में दिक्कत हुई। उन्हें समुद्र से बाहर लाकर प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल लाया गया मगर तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
ज़ुबीन ने अपने करियर में उन्होंने 38 हजार गाने गाए। एक बार एक वर्ष के अंदर उन्होंने विभिन्न भाषाओं के 800 गाने गाए थे। ज़ुबीन ने एक ही रात में 36 गाने रिकॉर्ड करने जैसे कारनामे भी किए हैं। अपने तीन दशक से ज़्यादा के करियर में हिन्दी सहित असमिया और बांग्ला के अलावा चालीस भाषाओं में गाने गाए। हिन्दी फिल्मों में उन्हें ‘या अली’ और ‘दिल तू ही बता’ से शोहरत मिली।













