वैज्ञानिकों ने लाखों साल पुराने इंसान का चेहरा फिर से बना लिया

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जेबेल इरहुद में मिले फॉसिल्स के चेहरे, जबड़े और दांत आज के होमो सेपियंस से कई तरह से मिलते-जुलते हैं, लेकिन उनकी खोपड़ी आज के इंसानों की खोपड़ी से लंबी और कम गोल थी।


वैज्ञानिकों ने हमारी प्रजाति के सबसे पुराने ज्ञात सदस्यों में से एक का चेहरा फिर से तैयार किया है, जिससे हमें यह अंदाज़ा मिलता है कि करीब 3,15,000 साल पहले इंसान कैसे दिखते होंगे। इस चेहरे की बनावट ऐसी थी कि इतने पुराने समय का होने के बावजूद, आज के इंसानों के बीच वह बिल्कुल भी अजीब नहीं लगता था।

हैरान करने वाले इस नतीजे को सामने लाने के लिए जो चेहरा आधार बना है, वह मोरक्को के जेबेल इरहौड में मिले प्राचीन होमो सेपियंस जीवाश्मों से लिया गया है। जेबेल इरहौड में मिले जीवाश्मों के चेहरे, जबड़े और दांतों में आधुनिक होमो सेपियंस जैसी ही कई अहम खूबियां हैं।

जेबेल एरहुद इलाके को उन ज़रूरी खोजों में से एक माना जाता है जिसने इंसानियत की शुरुआत के बारे में साइंटिफिक सोच को बदल दिया। रिसर्चर्स ने खोपड़ी की मदद से फोरेंसिक टेक्नीक का इस्तेमाल करके चेहरे को फिर से बनाया, जिसमें मुख्य रूप से ‘एरहुद 1’ नाम के फॉसिल्स को ध्यान में रखा गया था।

चेहरा बनाने के लिए इस्तेमाल की गई खोपड़ी में जीवाश्म के हिस्सों को मिलाया गया है, जबकि त्वचा का रंग, बाल और चेहरे की दूसरी नरम बनावट जैसी चीज़ें, जिनका पता हड्डियों से नहीं चल सकता, उनके लिए कुछ हद तक कलात्मक कल्पना की ज़रूरत होती है।

रिकंस्ट्रक्शन के अनुसार, उस व्यक्ति का चेहरा चौड़ा था, माथे का उभरा हुआ हिस्सा उभरा हुआ था, और कुल मिलाकर फीचर्स ऐसे थे कि वे कुछ हद तक आज के इंसानों जैसे लग रहे थे।

लेकिन, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह किसी एक इंसान का पूरा और सही चेहरा नहीं है, बल्कि मौजूद फॉसिल सबूतों के आधार पर साइंटिफिक रिकंस्ट्रक्शन है। खोपड़ी की हड्डियों से स्किन के रंग, बाल और दूसरे सॉफ्ट टिशू की डिटेल्स पता नहीं चल पातीं, इसलिए इन बातों का आर्टिस्टिक अंदाज़ा लगाना पड़ता है।

इस मिश्रण ने इन जीवाश्मों को यह समझने के लिए बहुत अहम बना दिया है कि इंसानों का विकास कैसे हुआ। जब 2017 में इनकी उम्र का पता चला, तो इस खोज ने होमो सेपियन्स के अस्तित्व के सबूतों को लगभग 3,00,000 साल पीछे पहुँचा दिया।

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