प्रधानमंत्री का लखनऊ में दो दिन विकास का सपना बेचने का विफल प्रयास

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री जी लखनऊ में दो दिन विकास का सपना बेचने का विफल प्रयास करते नज़र आए हैं। वे शिलान्यासों से अपनी खोई लोकप्रियता और विश्वसनीयता को बचाना चाहते है।

भाजपा सरकार की तमाम योजनाओं की घोषणाएं हवाई हैं क्योंकि अभी तक उनका काम जमींन पर कहीं दिखाई नहीं दिया है। किसान परेशान है, नौजवान बेरोजगारी से त्रस्त है, जनसामान्य मंहगाई की मार झेल रहा है और महिलाएं तथा बच्चियां तक दुष्कर्म की शिकार हो रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री जी की तमाम घोषणाएं और उनका प्रायोजित भव्य स्वागत मुख्यमंत्री जी इसलिए करा रहे हैं क्योंकि वे समाजवादी सरकार की योजनाओं के मुकाबले की एक भी योजना अब तक लागू नहीं कर पाए हैं।

 

विगत छह माह से निवेश का बड़ा ढिंढोरा पीटा जा रहा है, पर यह भी सच्चाई है कि जिस राज्य में कानून-व्यवस्था का संकट होगा वहां विकास की योजनाएं कैसे सफल हो सकेंगी। उनके भाषणों में समाजवादी पार्टी पर इसलिए हमले होते हैं क्योंकि भाजपा की नफरत और समाज को तोड़ने वाली सांप्रदायिक रीतिनीति का वही मुकाबला करने में सक्षम है।

अखिलेश यादव ने कहा कि यद्यपि किसान को अन्नदाता कहा जाता है किन्तु भाजपा सरकार में उसकी ही सर्वाधिक उपेक्षा हो रही है। वर्ष 2017-18 में चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 15 हजार करोड़ रूपया बकाया चल रहा है।

 

भाजपा ने 14 दिनों में बकाया अदायगी का वादा किया था, देर होने पर ब्याज सहित भुगतान किया जाना था। इसका अब तक भुगतान न होना दुर्भाग्यपूर्ण एवं भाजपा के किसान विरोधी चरित्र को उजागर करता है। गन्ना का लाभकारी मूल्य भी कम रखा गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री  ने कहा कि समाजवादी सरकार में किसानों के हित की तमाम योजनाएं लागू की गई थीं। भाजपा सरकार की अनदेखी से सैकड़ों किसान लागत मूल्य न मिलने से निराश और कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर चुके है। उनके परिवारों को कोई मदद भाजपा सरकार ने नहीं दी है।

भाजपा सरकार का रवैया पूर्णतया असंवेदनशील है। जनता को जितनी उम्मीदें थी वे सब ध्वस्त हो गई हैं। उनकी कथित योजनाओं से अब तक न तो रोजगार का सृजन हुआ है और नहीं जनता की माली हालत में सुधार आया है।

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