आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 1990 से अब तक, लगभग 50 करोड़ हैक्टेयर यानि लगभग 75 करोड़ फुटबॉल मैदानों के बराबर वनों का विनाश हो चुका है। इस बीच एक सुखद समाचार यह भी है कि पिछले एक दशक में दुनिया के हर क्षेत्र में वनों की कटाई में कमी आई है। यह आंकड़े संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा जारी किए गए हैं।

वनों की कटाई से तात्पर्य वनों के विनाश या शहरी उपयोग या बंजर भूमि जैसे अन्य उपयोगों के लिए वन भूमि के रूपान्तरण से है। वहीँ घनी हरियाली, पेड़ों और वन्यजीवों से भरपूर वन, पृथ्वी के फेफड़े और बहुत से समुदायों के लिए आजीविका का स्रोत हैं
आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक दशक से, दुनिया में हर साल लगभग 1.09 करोड़ हैक्टेयर वनों का विनाश हो रहा है। दूसरी तरफ दर उससे पिछले दशक की अवधि में प्रतिवर्ष 1.36 करोड़ हैक्टेयर और उससे पहले के दशक में, 1.76 करोड़ हैक्टेयर वनों के विनाश की तुलना में बेहतर है।
मंगलवार को जारी एफएओ की हालिया वन मूल्यांकन रिपोर्ट में इस आशाजनक रुझान की जानकारी दी गई है। बताते चलें कि यह रिपोर्ट हर पाँच वर्ष में प्रकाशित होती है। यह रिपोर्ट, इमेजिंग और उपग्रहों का उपयोग करने वाली एक उन्नत प्रक्रिया – Remote sensing और देशों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी से एकत्रित आँकड़ों का उपयोग करके, वैश्विक और क्षेत्रीय वन प्रवृत्तियों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
संयुक्त राष्ट्र, जलवायु परिवर्तन से निपटने पर केन्द्रित पेरिस समझौते जैसे अन्तरराष्ट्रीय समझौतों के माध्यम से, पर्यावरण संरक्षण के लिए एक सामूहिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है। एफएओ की वन रिपोर्ट जैसे आकलन, इस बात की निगरानी करते हैं कि क्या देश, संयुक्त राष्ट्र की उन सन्धियों और ढाँचों का पालन कर रहे हैं जिन पर उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं।
किस तरह किया जाता है वनों का संरक्षण
इस आकलन के अनुसार, दुनिया के वनों का पाँचवाँ हिस्सा क़ानूनी रूप से स्थापित संरक्षित क्षेत्रों में है – जो 1990 के बाद से 25.1 करोड़ हैक्टेयर अतिरिक्त संरक्षित वन है। सभी क्षेत्रों में एशिया का हिस्सा सबसे अधिक है, जहाँ 26 प्रतिशत वन आच्छादित हैं।
संरक्षण आदेशों से परे, आधे से अधिक वनों का प्रबन्धन किया जाता है। इसका मतलब है कि ज़मीन का इस्तेमाल या तो लकड़ी, रेशे और जैव ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा रहा है, या फिर मिट्टी व पानी की सुरक्षा और जैव विविधता के संरक्षण के लिए – या फिर पर्यटन, अन्य उपयोगों के लिए।
अगर वनों का प्रबन्धन किया जाता है, तो उनके मालिक कौन हैं? वर्ष 2020 तक, दुनिया के 71 प्रतिशत वन, सार्वजनिक यानि सरकारी स्वामित्व में हैं। उत्तरी और मध्य अमरीका में, आदिवासी या मूल निवासियों और स्थानीय समुदायों के पास 4.16 करोड़ हैक्टेयर वन थे।
आग, कीड़े, बीमारियाँ
वर्ष 2024 में एफएओ ने जंगल की आग और कीटों के बढ़ते ख़तरे को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा था।
आग एक आम ख़तरा बनी हुई है और सालाना औसतन 26.1 करोड़ हैक्टेयर भूमि को प्रभावित करती है, जिसमें से लगभग आधी भूमि वनाच्छादित है।
वर्ष 2020 में कीटों, बीमारियों और गम्भीर मौसम की घटनाओं के कारण, 4.1 करोड़ हैक्टेयर अतिरिक्त वन क्षेत्र को नुक़सान पहुँचा।
नवम्बर में ब्राज़ील में होने वाले यूएन जलवायु सम्मेलन – COP30 में एक विशेष मंडप, वनों की निगरानी और सुरक्षा के प्रयासों में योगदान देते हुए, जैव विविधता के संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देगा।















