नेस्ले को दुनिया भर में अपने कुछ शिशु दूध उत्पादों को उस समय वापस लेना पड़ा जब उसमे एक संभावित टॉक्सिन होने की बात सामने आई। यह मिलावट फ़ूड पॉइजनिंग का कारण बन सकती है। नेस्ले इंडिया ने भी जानकारी दी है कि वापस लिये गए प्रोडक्ट भारत में न तो आयात किए जाते हैं और न ही बेचे जाते हैं।

नेस्ले कंपनी के मुताबिक, उसके एसएमए ब्रांड के कुछ ख़ास बैच के शिशुओं के लिए बने इन्फ़ेंट फ़ॉर्मूला और फॉलो-ऑन फ़ॉर्मूला बच्चों को खिलाना सुरक्षित नहीं है। बताते चलें कि ये बैच दुनिया भर में बेचे गए है।
एक वीडियो जारी करते हुए नेस्ले के सीईओ फ़िलिप नाव्राटिल ने माफ़ी मांगी और बताया, “पिछले सप्ताह, हमने कुछ इन्फ़ेंट फ़ॉर्मूला के बैच वापस मंगाने की घोषणा की. यह हमने सावधानी के तौर पर किया, क्योंकि हमें कुछ उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली एक सामग्री की क्वालिटी में समस्या मिली।”
कम्पनी का कहना है कि इनमें सेरुलिड नाम का टॉक्सिन हो सकता है, जो उल्टी या जी मिचलाने जैसी समस्या का कारण बन सकता है। इस आशंका के चलते फ़्रांस, जर्मनी, इटली, ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ़्रीकासहित कई देशों से ये उत्पाद वापस ले लिए गए हैं।
नेस्ले इंडिया ने भी एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए जानकारी दी है कि जिन प्रोडक्ट्स को वापस लिया गया है वे भारत में न तो आयात किए जाते हैं और न ही बेचे जाते हैं। साथ ही यहाँ बेचे जाने वाले सभी उत्पाद एफ़एसएसएआई और दूसरे सभी नियमों व कानूनों के अनुरूप होने की बात भी कही गई है।
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन, नवजात शिशु को छह माह तक सिर्फ़ मां का दूध ही पिलाने की सिफ़ारिश करता है। वर्तमान में अब कई सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू हो गए हैं। इसके बावजूद अगर ज़रूरत पड़े तो शिशु को फार्मूला मिल्क देना चाहिए।
इसके बावजूद दुनिया भर के शिशुओं में केवल 47 प्रतिशत को ही पहले छह महीने तक सिर्फ़ मां का दूध पिलाया जा रहा है। यह आंकड़ा भी यूनिसेफ़ द्वारा सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भारत में बेबी फ़ूड और इन्फ़ेंट फ़ॉर्मूला बाज़ार का आकार 2024 में 5.99 अरब अमरीकी डॉलर था। यह जानकारी मार्केटिंग रिसर्च कंपनी आईएमएआरसी ग्रुप से मिली है। इसमें फ़ॉर्मूला मिल्क की सबसे बड़ी हिस्सेदारी 54 फीसद थी। एक अनुमान के मुताबिक़ साल 2033 तक इस बाज़ार का आकार 9.27 अरब अमरीकी डॉलर होने की संभावना है।















