फिल्म ‘गजब रात’ अदाकारी एक बार फिर से मनोज बाजपेयी ने अपनी कला परचम लहराया है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज इस फिल्म में मनोज ने गज़ब की एक्टिंग की है। हालाँकि अभी इस फिल्म को वह जगह नहीं मिली जो मिलनी चाहिए मगर इन सबके बीच मनोज की नाराज़गी सामने आई है।
इस बीच ‘बॉलीवुड हंगामा’ से बातचीत में मनोज बाजपेयी ने एक इंटरव्यू में फिल्म इंडस्ट्री को ‘बकवास’ कह दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि यहां कोई भाईचारा नहीं है, कोई मदद नहीं करता, कोई किसी को खुश नहीं देखना चाहता है।
बॉलीवुड ख़बरों के मुताबिक़, ‘गजब रात’ के प्रमोशन के दौरान मनोज बाजपेयी ने कहा कि ‘यह इंडस्ट्री बकवास है’ और यहां किसी को किसी की कोई कद्र नहीं है। इस इंटरव्यू के दौरान मनोज बाजपेयी बॉलीवुड से कुछ ज्यादा ही नाराज नज़र आए। इस बीच 57 वर्षीय मनोज ने फिल्म इंडस्ट्री को ‘एक बड़ा परिवार’ मानने वाली आम धारणा को चुनौती दी है।
मनोज का कहना कहना है कि मुझे छोड़िए, इंडस्ट्री का कोई भी व्यक्ति, चाहे वे कितनी भी बार यह कहें कि ‘इंडस्ट्री एक परिवार है’ – नहीं, यह सब बकवास है। यहां कोई भाईचारा नहीं है। हम सभी अपनी-अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और अपनी लड़ाई लड़ने के लिए आपको पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। कोई भी आपकी मदद करने नहीं आएगा। अगर कोई आपकी मदद के लिए आ जाए, तो समझ लीजिए कि वह आपका एक अच्छा दिन था, बस इतना ही।’
बताते चलें कि मनोज ने साल 1994 में ‘बैंडिट क्वीन’ से डेब्यू किया था और इंडस्ट्री में उन्होंने तीन दशक से ज़्यादा गुजरने के बाद इस दुनिया से नाराज़गी ज़ाहिर की है। चार बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीत चुके मनोज इन दिनों वह नेटफ्लिक्स पर रिलीज फिल्म ‘गजब रात’ को लेकर चर्चा में ज़रूर हैं मगर उनकी इस फिल्म को भी बहुत अच्छे रिव्यूज नहीं मिले हैं।
इंटरव्यू में मनोज ने अपने अनुभव के हवाले से कहा कि इतने लंबे समय तक इंडस्ट्री का बने रहने के बावजूद, उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि वह सच में इसका हिस्सा हैं। उन्होंने फिल्म सेट पर बराबरी, कलाकारों के बीच बेहतर बातचीत और एक समावेशी काम के माहौल की जरूरत पर भी जोर दिया।
मनोज बाजपेयी ने ‘बॉलीवुड हंगामा’ से बातचीत में कहा, ‘अगर आप मुझे एक उदाहरण मानना चाहें, तो मैं एक उदाहरण हूं। मैं फिल्म इंडस्ट्री से हूं, फिर भी मुझे नहीं लगता कि मैं इसका हिस्सा हूं। जरूरी नहीं कि आप बांद्रा से ही हों। आप मलाड में रहकर भी एक्टिंग कर सकते हैं। अहम बात यह है कि आप जो भी करें, वह अच्छा हो। बाकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। असल में कोई ‘परिवार’ या ‘बिरादरी’ जैसी चीज नहीं होती। सबसे बड़ा भ्रम यही है कि यह इंडस्ट्री एक परिवार है। यह किसी परिवार की तरह नहीं है। सबके ऑफिस अलग-अलग हैं, कोई किसी के साथ पार्टी नहीं करता और अगर किसी को किसी की फिल्म पसंद आ जाए, तो भी कोई फोन करके तारीफ नहीं करता।’