ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समर्पण की अपील को खारिज कर दिया है। इस बीच ईरान की उर्मिया मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्र मंगलवार को आर्मेनिया के रास्ते भारत लाए गए। लगभग 110 भारतीय छात्रों में से 90 छात्र कश्मीर के रहने वाले हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को छात्रों को ईरान से बाहर निकालने की पुष्टि की थी।

आर्मेनिया के येरेवन एयरपोर्ट से फ्लाइट इन छात्रों को लेकर कतर की राजधानी दोहा के लिए रवाना हुई। इस सफर में ईरान से आर्मेनिया लाए गए इन छात्रों को राजधानी येरेवन के होटलों में ठहराया गया। इसके बाद इन्हें कतर होते हुए आज भारत लाया गया है। युद्ध के कारण ईरान के ज्यादातर इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस समय नागरिक उड़ानों के लिए बंद हैं।
वापस अपने देश पहुंचने वाले इन छात्रों ने बताया- ‘वहां के हालात हर दिन खराब होते जा रहे हैं। खासकर तेहरान में स्थिति बेहद खराब है। बताते चलें कि ईरान में 1,500 स्टूडेंट्स सहित लगभग 10 हजार भारतीय नागरिक फंसे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि भले ही वर्तमान में देश के एयरपोर्ट हैं, मगर लैंड बॉर्डर्स खुले हुए हैं।
ईरान छोड़ने से पहले, मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों का नाम, पासपोर्ट नंबर, गाड़ी डिटेल्स, देश से निकलने का समय और उस बॉर्डर की जानकारी जमा की थी जिस मार्ग को निकासी के लिए इस्तेमाल किया गया।
बड़ी संख्या में लोग उत्तर में कैस्पियन सागर की ओर जा रहे हैं, जो अपेक्षाकृत शांत और दूरदराज का इलाका है। इस बीच रास्ते इतने जाम हैं कि वहां पहुंच पाना भी मुश्किल हो गया है।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील को भी खारिज कर दिया है। देश के नाम संबोधन में खामेनेई ने अमरीका और इजरायल पर जमकर निशाना साधा है। उनका कहना है कि अगर अमरीका इस युद्ध में शामिल होता है तो इससे सिर्फ नुकसान ही बढ़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि हमारी सेनाएं रक्षा को तैयार हैं। इजरायल ने एक बड़ी गलती की है, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। उन्होंने ईरान के लोगों द्वारा शहीदों के खून को कभी नहीं भूलने की भी बात कही।
पिछले 6 दिनों से ईरान और इसरायल के बीच जंग जारी है। अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक शहर के पेट्रोल पंपों पर कारों की लंबी-लंबी लाइनें लगने लगी हैं। लोग डरे हुए हैं और शहर छोड़कर बाहर जाने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिर्फ तेहरान में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।














