देश में आगामी जनगणना को देखते हुए स्वयं की गणना के लिए एक विशेष समर्पित वेब पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। ये वेब पोर्टल राष्ट्रीय गणना अभ्यास के दोनों चरणों के लिए होगा।

देश में ऐसा पहली बार होगा जब देशवासी एक समर्पित वेब पोर्टल के ज़रिए स्वयं की गणना कर सकेंगे। यह सुविधा जनगणना के दोनों चरणों के लिए होगी जो हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस (एचएलओ) और जनसंख्या गणना के लिए उपलब्ध होगा।
अधिकारियों ने जानकारी में बताया कि आगामी जनगणना के दौरान स्वयं गणना के लिए एक विशेष समर्पित वेब पोर्टल लॉन्च किया जाएगा।उनके मुतबिक, ये वेब पोर्टल राष्ट्रीय गणना अभ्यास के दोनों चरणों के लिए उपलब्ध होगा। आगे उन्होंने यह जानकारी भी दी कि देश की पहली डिजिटल जनगणना में, गणनाकर्ता अपने एंड्रॉइड और एप्पल फोन पर मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके नागरिकों का डेटा एकत्र करेंगे।
जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में इस डिजिटल जनगणना पहल को एक परिवर्तनकारी कदम बताया जा रहा है। पहली बार, डेटा एकत्र करने और इसे केंद्रीय सर्वर पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।
सुविधा की बदौलत जनगणना डेटा की जल्दी उपलब्धता के अलावा संग्रह, संचरण और भंडारण के समय डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुत कड़े डेटा सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे।
बताते चलें कि एचएलओ पहली अप्रैल, 2026 से शुरू होगा। उसके बाद पहली फरवरी 2027 से शुरू होगा। इसमें जनसंख्या गणना (पीई) की जाएगी। इसके अलावा आगामी जनगणना में घर के सदस्यों की जातियों की भी गणना की जाएगी।
याद दिला दें कि साल 2027 की जनगणना के लिए संदर्भ तिथि पाहि मार्च, 2027 को 00:00 बजे और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए पहली अक्टूबर, 2026 को 00:00 बजे होगी।
देश में जनगणना के लिए 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी की गई थी। प्रक्रिया प्रारम्भ होने के बाद से 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी। इस व्यापक अभ्यास के लिए फील्ड ट्रेनर करीब 34 लाख गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। महापंजीयक ने प्रत्येक चरण के लिए तीन-स्तरीय केंद्रित और आवश्यकता-आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था की है। इसमें राष्ट्रीय प्रशिक्षक, मास्टर प्रशिक्षक और फील्ड प्रशिक्षक शामिल होंगे।
जनसंख्या गणना के दौरान किसी भी चूक या दोहराव से बचने के पूरे प्रयास किए जाते हैं। इस संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आरजीआई ने कहा है कि वे प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं में प्रस्तावित कोई भी बदलाव 31 दिसंबर से पहले करें। इसके बाद ही उन्हें जनगणना अभ्यास के लिए अंतिम माना जाएगा।
भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में कहा था कि जनगणना के लिए सभी गांवों और कस्बों को एक समान गणना ब्लॉकों में विभाजित किया जाता है। साथ ही प्रत्येक ब्लॉक के लिए एक गणनाकर्ता नियुक्त किया जाता है।
प्रशासनिक इकाइयों के नियमों के मुताबिक होने के बाद ही जनगणना कराई जाती है। उदहारण के तौर पर आइल लिए जिलों, उप-जिलों, तहसीलों, तालुकाओं और पुलिस स्टेशनों की सीमाएं स्थिर होने के तीन महीने बाद ही जनगणना की जा सकती हैं।
इसके बारे में जनगणना आयुक्त का कहना है कि पहली अप्रैल 2026 से मकान सूचीकरण कार्य, पर्यवेक्षकों और गणनाकारों की नियुक्ति और उनके बीच कार्य विभाजन किया जाएगा। उसके बाद से एक फरवरी 2027 से जनगणना शुरू होगी।













