आज सुबह सात बजे से बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान शुरू हो गया है। राज्य में 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव होने हैं। दो चरणों में हो रहे ये चुनाव इस बात की बड़ी परीक्षा हैं कि चुनाव आयोग की ओर से चलाए गए विशेष गहन संशोधन अभियान से मतदाता सूचियों की शुद्धता पर कितना असर पड़ा है।

बिहार के 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान चलेगा। इस बीच 1314 उम्मीदवार अपनी किस्मत आज़माएंगे। इस चरण में महिला उम्मीदवार मात्र 121 यानी 9 प्रतिशत है। पहले चरण में कुल 519 उम्मीदवार करोड़पति हैं। दागी उम्मीदवारों की बात करें तो यह संख्या 423 हैं।
बताते चलें कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में एसआईआर अभियान के बाद लगभग 7.42 करोड़ मतदाता शामिल हुए हैं, जो 2025 की शुरुआत में 7.8 करोड़ से कम थे। इस दौरान 21 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा भी गया है।
गौरतलब है कि एसआईआर-पूर्व सूची से कुल 68.66 लाख नाम हटाए गए हैं। इनमें से 65 लाख (जिसमें 22 लाख मृत शामिल थे) पहली अगस्त के मसौदा रोल में हटाए गए थे, और अंतिम प्रकाशन से पहले 3.66 लाख और नाम हटाए गए।
बिहार का चुनाव इस नज़रिए से भी महत्वपूर्ण है क्यूंकि यहाँ चुनाव आयोग की ओर से चलाए गए एसआईआर यानी विशेष गहन संशोधन अभियान का मतदाता सूचियों की शुद्धता पर पर प्रभाव का आंकलन भी सामने आएगा। दरअसल एक दशक से अधिक समय से यहाँ मतदान लगभग 57 प्रतिशत पर स्थिर है।
पहले चरण के मतदान के साथ ही मतदान केंद्रों पर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में, बिहार में देश में सबसे कम 56.4 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो राष्ट्रीय औसत से 10 प्रतिशत अंक कम था। हालाँकि पिछली बार यह रिकॉर्ड ऊंचाई साल 2000 में 62.5 प्रतिशत थी।
इससे पहले बिहार में चुनाव में मदतान संबंधी आखिरी बड़ी बढ़ोतरी साल 2015 के विधानसभा चुनावों में देखने को मिली थी। उस समय यह 2010 के मतदान की तुलना में 52.6 प्रतिशत से बढ़कर 56.8 प्रतिशत पहुँच गई थी।
इस बीच पटना की 14 विधानसभा सीटों से करीब 3.95 लाख वोटर्स को सूची से हटाया गया है। याद दिला दें कि पटना में पिछले चुनावों में निराशाजनक रूप से कम मतदान दर्ज किया गया था। ऐसे में इस बार के वोट प्रतिशत को देखन दिलचस्प होगा।
विशेष गहन संशोधन अभियान के तहत इस बार मधुबनी से करीब 3.5 लाख नाम हटाए गए। वहीँ पूर्वी चंपारण से 3.1 लाख, पश्चिमी चंपारण 1.91 लाख, सीतामढ़ी से 2.4 लाख, सुपौल से 1.2 लाख, अररिया 1.5 लाख और पूर्णिया से 2.7 लाख नाम हटाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना कि इस प्रक्रिया का असर मतदान पर पड़ सकता है।











