अरबों लोगों के लिए सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था उनकी बुनियादी आवश्यकता है।जलवायु परिवर्तन के साथ जनसंख्या वृद्धि से जूझ रहे विश्व के समक्ष एक और विशाल चुनौती है। इसी समस्या से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए 35वें ‘विश्व जल सप्ताह’ के लिए विश्व नेता, वैज्ञानिक और पैरोकार स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एकत्र हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, दुनिया भर में 2.2 अरब लोगों के लिए सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था का अब भी अभाव है, जबकि इस अहम संसाधन की मांग निरन्तर बढ़ती जा रही है।
स्टॉकहोम में आयोजित इस बैठक में जल और वैश्विक तापमान में वृद्धि के बीच कड़ी को रेखांकित किया गया है। यहाँ जुटने वाले लोग जलवायु कार्रवाई में जल की भूमिका पर विमर्श कर रहे हैं।
हम एक ऐसी धरती पर वास कर रहे हैं जहाँ तापमान निरन्तर बढ़ रहा है। ऐसे में जल की भरोसेमन्द आपूर्ति, जलवायु अनुकूलन प्रयासों के केन्द्र में है। सुरक्षित पेयजल टिकाऊ विकास के साथ मानव अस्तित्व, सामाजिक-आर्थिक विकास, ऊर्जा व खाद्य उत्पादन और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए बहुत आवश्यक है।
भारत में पानी के कारण हर वर्ष दो लाख लोगों की मौत हो रही है। 2030 तक ये स्थिति और विकराल हो जाएगी, जब देश की लगभग 40 फीसदी आबादी के सामने पानी का संकट होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट से पता चलता है कि विश्व की आधी आबादी अब भी सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता और साफ़-सफ़ाई व्यवस्था (WASH) तक पहुँच नहीं है, जिनकी सुलभता के ज़रिये वर्ष 2019 में कम से कम 14 लाख मौतों को टाला जा सकता था।
विश्व के विभिन्न देशों में दूरदराज में स्थित क्षेत्रों में जल सुलभता में बेहतरी आने से स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं, विशेष रूप से भूमिबद्ध विकासशील देशों में।
जल मामलों के लिए यूएन संस्था, UN Water की ओर से बुधवार को उन भूमिबद्ध विकासशील देशों के साथ चर्चा का आयोजन किया है, जिन्होंने सर्वजन के लिए जल व साफ़-सफ़ाई के मुद्दे पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस चर्चा में भूटान, रवांडा और सऊदी अरब जैसे देश अपने अनुभव और सुरक्षित पेयजल व कारगर जल प्रबन्धन के विषय में अपने सबक़ साझा करेंगे।
सभी जानते हैं कि जल के सुरक्षित प्रबन्धन, साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता सेवाओं के अभाव से, मानव कल्याण, गरिमा व अवसरों पर असर होता है। विशेष रूप से महिलाऐं और लड़किया इससे सबसे अधिक प्रभावित होती हैं।
दूषित जल, साफ़-सफ़ाई की अपर्याप्त व्यवस्था और गंदगीपूर्ण तौर-तरीक़ों की वजह से अत्यधिक निर्धनता के विरुद्ध लड़ाई कमज़ोर हो रही है और विश्व के सबसे निर्धन देशों में बीमारियों का प्रकोप है।
इसके मद्देनज़र, जल से जुड़े मामलों के लिए यूएन संस्था अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर दानदाताओं की लामबन्दी के प्रयास करेंगे ताकि मौजूदा कमियों को दूर किया जा सके। इसे अलावा जल की सार्वभौमिक सुलभता सुनिश्चित करने के इरादे से नवाचारी उपायों पर भी ध्यान केन्द्रित किया जाएगा।













