सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें पे कमीशन के टर्म्स को मंज़ूरी दी थी, जिससे नए सैलरी स्ट्रक्चर को लागू करने का रास्ता साफ हो गया था। इस साल का अंतिम दिन यानी 31 दिसंबर, 2025 करीब 11.5 मिलियन सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉई और पेंशनर्स के लिए एक अहम तारीख है। इसी दिन 7वें पे कमीशन का 10 साल का टर्म खत्म हो रहा है।

ट्रेडिशन के मुताबिक, पहली जनवरी, 2026 को नए पे स्केल की प्रभावी तिथि माना जाएगा। हालांकि, एम्प्लॉई को असल पेमेंट के लिए थोड़ा और इंतज़ार करना पड़ सकता है। कमीशन को अपनी रिकमेन्डेशन तैयार करने के लिए नवंबर 2025 से 18 महीने का समय दिया गया है। अगर कैबिनेट की मंज़ूरी में देरी भी होती है, तो सैलरी हाइक पहली जनवरी, 2026 से लागू होगी और पिछला बकाया एरियर के तौर पर दिया जाएगा।
सैलरी में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है। यदि ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 32,940 रुपये से 44,280 रुपये तक पहुंच सकती है।
गौरतलब है कि सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिसके चलते कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिला था। इसी आधार पर यह माना जा रहा है कि अगर आठवें वेतन आयोग में भी अच्छा फिटमेंट फैक्टर तय होता है, तो सैलरी में अच्छी बढ़ोतरी तय है।
हाल ही में हुई बैठक में NC-JCM की स्टाफ साइड ने फैसला किया कि वह आठवें वेतन आयोग के सामने न्यूनतम वेतन तय करने को लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव रखेगी। स्टाफ साइड का कहना है कि न्यूनतम वेतन को सिर्फ खाने-पीने और कपड़ों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। न्यूनतम वेतन तय करते समय इन बातों को भी शामिल किए जाने की मांग की गई है-
वयस्क व्यक्ति की कैलोरी जरूरत।
परिवार के सदस्यों की संख्या।
खाना, कपड़े और अन्य गैर-खाद्य जरूरतें।
सरकारी राशन दुकानों और सहकारी स्टोर्स की वास्तविक खुदरा कीमतें।
त्योहारों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़े अतिरिक्त खर्च।
डिजिटल और तकनीकी खर्च, जैसे मोबाइल फोन, इंटरनेट और रोजमर्रा की टेक जरूरतें।
स्टाफ साइड का तर्क है कि आज के दौर में टेक्नोलॉजी कोई लग्जरी नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरत बन चुकी है। इसलिए इसे न्यूनतम वेतन के फॉर्मूले से बाहर नहीं रखा जा सकता।
इसके अलावा आठवें पे कमीशन की सिफारिशें न सिर्फ फिटमेंट फैक्टर पर बल्कि इन खास फैक्टर्स पर भी आधारित होंगी-
महंगाई: पिछले 10 सालों में रहने का खर्च बढ़ा है।
रेवेन्यू कलेक्शन: सरकारी फाइनेंस और टैक्स कलेक्शन।
डियरनेस अलाउंस (DA) का मर्जर
समान काम के लिए समान वेतन
निचले लेवल के कर्मचारियों के लिए सैलरी गैप को कम करना। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार 2026-27 के दौरान अलाउंस और बेसिक पे में बैलेंस्ड बढ़ोतरी लागू करेगी ताकि “खुशी” का माहौल बन सके। हालांकि, इस बात की उम्मीद कम है कि जनवरी 2026 तक अकाउंट्स में पैसे जमा हो जाएंगे। नई सैलरी और एरियर का पेमेंट दिवाली 2026 तक शुरू हो सकता है।















