लखनऊ में गोमती नदी से आई बाढ़ को काबू करने के साथ राहत कार्य तेज करने के सभी प्रयास जारी

राजधानी लखनऊ में जलभराव से बिगड़े हालात अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं आ सके हैं। लखनऊ उत्तर के इलाकों से लेकर पूर्वी क्षेत्रों सहित शहीद पथ के पूर्वी छोर तक कई स्थानों पर पानी भरने की खबरें मिल रही हैं। स्थिति को काबू में करने के लिए एलडीए ने पोकलैंड मशीनें और जेसीबी लगा दी हैं। जलभराव को काबू करने के साथ राहत कार्य तेज करने के सभी प्रयास जारी हैं।

इंडिया टीवी की एक खबर के अनुसार, सितंबर के आखिरी दिनों में हुई भारी बारिश के बाद गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। लखनऊ में नदी का पानी सामान्य स्तर से करीब 2.44 मीटर यानी लगभग आठ फीट ऊपर पहुंच गया है। जलस्तर 108.14 मीटर तक दर्ज किया गया है।

खबर में आगे कहा गया है कि प्रशासन के मुताबिक शाहजहांपुर और सीतापुर की ओर से आया अतिरिक्त पानी भी गोमती के जलस्तर में बढ़ोतरी की बड़ी वजह है। गोमती नदी पीलीभीत से निकलती है और कई जिलों से होते हुए लखनऊ पहुंचती है। एसीपी ट्रैफिक राधा रमन सिंह ने बताया कि फिलहाल प्रभावित इलाकों में यातायात चल रहा है। हालांकि, अगर पानी का स्तर और बढ़ता है तो जरूरत के मुताबिक ट्रैफिक को रोका जा सकता है।

सहायता कार्यों में जुटे स्थानीय लोगों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं सहित सबसे बड़ी समस्या डाक्टरों की कमी है। इन लोगों का कहना है कि करीब 10 लाख की आबादी बाढ़ और जलभराव से प्रभावित हुई है।

पानी का बढ़ना अभी भी जारी है। स्थानीय लोगों को आवागमन सहित हर तरह की सुविधा के लिए जूझना पड़ रहा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में बाढ़ की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भाजपा के लोग जानबूझकर पानी ला रहे हैं और बाढ़ की स्थिति बना रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बढ़ते जलस्तर के बीच महापौर और नगर आयुक्त ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। नाव से निरीक्षण के दौरान हालात पर चर्चा भी की गई। राहत का इंतजार करने वालों की निगाहें प्रशासन कीओर लगी हैं। इस बीच जलभराव से जूझ रहे लोगों के बीच राहत और बचाव कार्यों की तैयारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

इस बीच एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मीडिया को बताया कि पानी का नया प्रवाह बंद होने के बाद नदी के जलस्तर में करीब छह इंच की कमी दर्ज की गई है। उनके अनुसार, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और अधिकारियों-अभियंताओं की 24 घंटे ड्यूटी जारी है। राहत के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने पोकलेन और जेसीबी मशीनें लगाई जाने की खबर है। टीम नदी किनारे के इलाकों का जायजा ले रही है।

खबर है कि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) की इमारत भी पानी से घिरी हुई है। टेंडर पाम की ओर से सुल्तानपुर रोड जाने वाली सड़क पर बारिश का पानी भरने से यातायात प्रभावित हो गया है। इकाना स्टेडियम से प्लासियो की ओर जाने वाली सड़क भी पानी में डूब गई है। बाढ़ से 20 साल बाद लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह बंद करना पड़ा है। बैकुंठ धाम भी पूरी तरह जलमग्न है। आस पास के लोगों का कहना है यहां शव रखने वाले चबूतरे पानी में डूब गए हैं। इन लोगों ने शिकायत की है कि हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने पर किसी तरह की कोई मदद नहीं मिल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पीलीभीत सहित सीतापुर, हरदोई और लखीमपुर खीरी में हुई बारिश के बाद गोमती में पानी बढ़ा है। इटौंजा, फैजुल्लागंज और जेहटा में भी बाढ़ का असर बना हुआ है। पहले 8 अक्टूबर तक राहत की उम्मीद थी, मगर फिर से बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार गोमती नगर विस्तार में बाढ़ का पानी ट्रिपल आईटी (IIIT) लखनऊ परिसर में घुसने के बाद संस्थान को अगले आदेश तक बंद कर दी गई हैं। बुधवार को होने वाली एमटेक परीक्षाएं भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्थगित कर दी गई हैं। छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए हॉस्टल भी खाली करा दिए गए हैं। हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को कैंसर अस्पताल और छात्रों को गोल्फ सिटी स्थित एक हॉस्टल में भेजा गया है। सुरक्षा के मद्देनजर हॉस्टल की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई है।

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