समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और सरकारी डेटा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने राज्य चुनाव आयोग और केंद्रीय चुनाव आयोग के डेटा में अंतर को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया है।

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के “वोट काटने” वाले पिछले बयानों से अधिकारियों की “बेईमानी” का पता चलता है, और अब वोटरों को सावधान रहने की जरूरत है।
डेटा और पारदर्शिता पर सवाल अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं से बूथ लेवल पर मेहनत करने की अपील करते हुए सवाल उठाया, “अगर राज्य और केंद्र के चुनाव डेटा में अंतर है, तो वोटर रोल के स्पेशल रिवीजन का क्या औचित्य है?” इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि मैपिंग ऐप और चुनाव आयोग को टेक्निकल सपोर्ट देने वाली कंपनियां पूरी निष्पक्षता के साथ काम करेंगी। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिया कि जो लोग छूट गए हैं, उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाएं।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर प्रयागराज माघ मेले में बन रहे मुलायम सिंह यादव स्मृति सेवा संस्थान की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस पर भी एतराज़ जताया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को नेताजी पर जनता के भरोसे का पता है, इसलिए वहां “एक्स्ट्रा चेकिंग” और सुरक्षा के उपाय बढ़ाए जा रहे हैं।













