कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए नई अंतरराष्ट्रीय यात्रा एडवाइजरी जारी करते हुए भारत को उच्च स्तर की सतर्कता वाली सूची में शामिल कर लिया है। यह सब उस समय हो रहा है जब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दौरे की बात भी चल। इसे द्विपक्षीय रिश्तों के साथ भावनात्मक खिलवाड़ बताते हुए इस फैसले को लेकर भारत में नाराजगी का माहौल है।

कनाडा की यह यात्रा एडवाइजरी ऐसे समय पर आई है जब दोनों देश रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
एक ओर जहाँ भारत-कनाडा में दशकों पुराने संबंधों में आई खटास को कम करने के लिए दोनों देशों के स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं तो वहीँ दूसरी तरफ कनाडा सरकार के इस कदम ने नया विवाद पैदा कर दिया है।
इस बीच पीएम मार्क कार्नी के प्रस्तावित भारत दौरे की भी तैयारी जारी है, वहीँ इस से पहले कनाडा ने अपने नागरिकों के लिए नई अंतरराष्ट्रीय यात्रा एडवाइजरी जारी करते हुए भारत को उच्च स्तर की सतर्कता वाली सूची में शामिल कर लिया है।
भारत यात्रा पर कनाडा ने पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है लेकिन भारत को पाकिस्तान, ईरान, यमन, वेनेजुएला, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, सीरिया, हैती, अफगानिस्तान और दक्षिण सूडान जैसे देशों के साथ एक ही श्रेणी में रखना कई सवाल खड़े कर रहा है।
जनवरी के दूसरे सप्ताह में अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट की गई यात्रा सलाह में कनाडा सरकार का कहना है कि कुछ देशों में राजनीतिक अस्थिरता, सशस्त्र संघर्ष, नागरिक अशांति, सुरक्षा खतरे, बाधित उड़ानें और सीमित कांसुलर सहायता जैसे जोखिम मौजूद हैं। इसी आधार पर भारत को भी अत्यधिक सतर्कता की श्रेणी में रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार और कनाडा के वैंकूवर में रह रहे लुधियाना निवासी परमिंदर दत्त का कहना है कि भारत को इस सूची में शामिल करना द्विपक्षीय संबंधों को और क्षति पहुंचा सकता है। कनाडा चाहता तो एडवाइजरी की भाषा में संतुलन व नरमी बरत सकता था, जिससे संदेश कम आक्रामक जाता। लेकिन यह भाषा कड़ी है।
भारत और कनाडा के संबध बेहद अच्छे थे मगर 2023 में इन रिश्तों में कुछ खटास आ गई। दोनों देशों के संबंध उस समय बिगड़े जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की ओर से आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संभावित संलिप्तता की बात सामने आई ।















