सूनामी का नाम एक बार फिर से सारी दुनिया में गर्दिश कर रहा है और इसका कारण है पूर्वी रूस में आने वाले भूकंप के बाद प्रशांत महासागर के विभिन्न हिस्सों में सुनामी की चेतावनी। ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि सुनामी क्या है, यह कैसे उत्पन्न होती है। इससे होने वाली विनाशकारी प्रकृति को भी समझना होगा।

सुनामी तूफानी पानी की एक ऐसी लहर है जो समुद्र में दूर-दूर तक फैल जाती है। सुनामी लहरें ज़्यादातर समुद्र के नीचे आए भीषण भूकंपों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती हैं। जब ऐसे भीषण भूकंप के कारण पृथ्वी की पपड़ी अचानक और ज़ोर से हिलती है, तो पानी की एक बड़ी मात्रा प्रभावित होकर लहरों के रूप में हिचकोले लेने लगती है।
अपने केंद्र से उठने वाली ये समुद्री लहरें बिजली की गति से और अकसर हवाई जहाज से भी तेज़ रफ़्तार में सभी दिशाओं में फैल जाती हैं। यह फैलाव हज़ारों किलोमीटर तक तटीय क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। हालाँकि ज़्यादातर सुनामी तेज़ भूकंपों के कारण आती हैं, लेकिन ये ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन, बड़े तूफ़ान या समुद्र में उल्कापिंड गिरने से भी आ सकती हैं।
जानकार बताते हैं कि साल 2030 तक तटीय आबादी के लिए सुनामी, बाढ़ और तूफ़ान का ख़तरा काफ़ी बढ़ जाएगा, इसलिए सुनामी के ख़तरे को रोकने के उपाय बेहद ज़रूरी हैं। वहीँ संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सुनामी चेतावनी प्रणालियाँ हर जगह उपलब्ध नहीं हैं।
शुरुआत में जब समुद्र में सुनामी लहरें उठती हैं, तो उनकी ऊँचाई कम और लहरों के बीच की दूरी ज़्यादा होती है, लेकिन जब ये लहरें तट के पास पहुँचती हैं, तो समुद्र तल की संरचना के कारण उनके बीच की दूरी कम हो जाती है और ऊँचाई काफ़ी ज़्यादा हो जाती है। ये लहरें तट से कई बार, कई घंटों या कभी-कभी कई दिनों तक टकरा सकती हैं।
तट पर रहने वाले लोगों के लिए सुनामी का पहला संकेत आमतौर पर यह होता है कि समुद्र अचानक पीछे खिसक जाता है जिससे तट सूख जाता है। जिसके नतीजे में खतरनाक रूप से ऊँची लहरें उठती हैं।
जानकारों के अनुसार, वैसे तो प्रशांत महासागर भूकंप और सुनामी के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्से भी इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं।
इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर साल 2004 में 9.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे हिंद महासागर में एक घातक सुनामी आई। इसके परिणाम स्वरुप निकलने वाली ऊर्जा हिरोशिमा पर गिराए गए 23,000 परमाणु बमों जितनी थी। इस आपदा में 11 देशों में अनुमानित 2,20,000 लोग मारे गए, जिनमें से कई भूकंप के केंद्र से हज़ारों किलोमीटर दूर थे।
1883 में, प्रशांत महासागर के क्राकाटोआ द्वीप में ज्वालामुखी विस्फोट से आई सुनामी में लगभग 30,000 लोग मारे गए थे और इसकी आवाज़ 4,500 किलोमीटर दूर तक सुनी गई थी।
रोमन इतिहासकार मार्सेलिनस ने 365 ईस्वी में अलेक्जेंड्रिया में आई सुनामी के बारे में लिखा है कि समुद्र पीछे हट गया, पानी इतना आगे बढ़ गया कि समुद्र तल दिखाई देने लगा और विभिन्न समुद्री जीव दिखाई देने लगे, फिर अचानक पानी वापस आ गया और हज़ारों लोगों को बहाकर ले गया, जिससे उनकी मौत हो गई।
रोमन इतिहासकार के अनुसार, इस सुनामी में बड़े जहाज तटीय इमारतों की छतों से भी टकराए थे। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सुनामी चेतावनी प्रणालियाँ हर जगह उपलब्ध नहीं हैं।
