शायद कम लोगों की जानकारी में यह बात हो कि किसी कंपनी के जीपीटी‑3 मॉडल से 10 से 50 सवालों के जवाब देने में लगभग आधा लीटर पानी की खपत होती है। दूसरे शब्दों में समझें तो हर जवाब के लिए क़रीब 2 से 10 चम्मच पानी की खपत होती है।

यह कहना है बीबीसी की एक रिपोर्ट का। रिपोर्ट बताती है कि अमरीका के कैलिफ़ोर्निया और टेक्सस में की गई एक स्टडी में उपरोक्त जानकारी सामने आई है। एआई और पानी की खपत से जुड़ी यह स्टडी कुछ तथ्य उजागर करती है। जैसे-
ओपनएआई के चीफ़ एग़्जीक्यूटिव ऑफ़िसर (सीईओ) सैम ऑल्टमैन का कहना है कि चैटजीपीटी से किए गए एक सवाल का जवाब पाने में लगभग एक चम्मच के पंद्रहवें हिस्से जितना पानी लगता है।
गूगल का कहना है कि उसके डेटा सेंटर्स ने 2024 में पानी के स्रोतों से 37 अरब लीटर पानी लिया। इसमें से 29 अरब लीटर पानी की खपत” हुई। इसका बड़ा हिस्सा भाप बनकर उड़ गया। ओपनएआई का कहना है कि चैटजीपीटी हर दिन एक अरब सवालों के जवाब देता है और चैटजीपीटी अकेला एआई बॉट नहीं है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक़, पानी के इस्तेमाल का अनुमान कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे किस तरह का सवाल है, जवाब कितना लंबा है, जवाब कहां प्रोसेस हो रहा है और कैलकुलेशन में किन चीज़ों को शामिल किया गया है।
अध्ययन के लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, रिवरसाइड के प्रोफ़ेसर शाओलेई रेन कहते हैं- “जितना ज़्यादा हम एआई का इस्तेमाल करेंगे, उतना ही ज़्यादा पानी खर्च होगा।”
शोध के दौरान अमरीकी शोधकर्ताओं द्वारा की गई इस स्टडी में जो 500 मिलीलीटर का अनुमान लगाया गया है, उसमें उस पानी को भी गिना गया है जो बिजली बनाने में लगता है। इसके अलावा कोयला, गैस या परमाणु ऊर्जा केंद्रों में टर्बाइन चलाने के लिए भाप तैयार करने जैसे तथ्य भी इसमें शामिल किए गए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी एआई टेक कंपनियां यह नहीं बतातीं कि उनकी एआई से जुड़ी गतिविधियों में कितना पानी खर्च होता है, मगर उनके कुल पानी के इस्तेमाल के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।
हालाँकि ओपनएआई में बड़े निवेशक और शेयरहोल्डर गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ़्ट, इन तीनों की एंवायरमेंटल रिपोर्ट के मुताबिक़ 2020 के बाद से इनके पानी के इस्तेमाल में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान गूगल का पानी इस्तेमाल लगभग दोगुना होने की बात कही गई है। इस संबंध में अमेज़न वेब सर्विसेज़ (एडब्ल्यूएस) ने कोई आंकड़ा नहीं मिला है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे एआई की मांग बढ़ेगी, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) का अनुमान है कि 2030 तक डेटा सेंटर्स का पानी इस्तेमाल लगभग दोगुना हो जाएगा। इसमें वह पानी भी शामिल है जो बिजली बनाने और कंप्यूटर चिप बनाने की प्रक्रिया में लगता है।
रिपोर्ट से होने वाले खुलासे से पता चलता है कि गूगल का कहना है कि उसके डेटा सेंटर्स ने 2024 में पानी के स्रोतों से 37 अरब लीटर पानी लिया, जिसमें से 29 अरब लीटर पानी “खपत” हो गया यानी इसका बड़ा हिस्सा भाप बनकर उड़ गया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इतनी मात्रा का पानी 16 लाख लोगों की एक साल तक रोज़ाना 50 लीटर पीने और इस्तेमाल करने की ज़रूरत पूरी कर सकता है। इस यूँ भी समझ सकते हैं कि फिर गूगल के मुताबिक़, इतना पानी अमरीका के दक्षिण-पश्चिमी इलाक़ों में 51 गोल्फ़ कोर्स को एक साल तक सींचने के बराबर है।
इस विषय पर एकत्र जानकारी में ओपनएआई का कहना है कि चैटजीपीटी हर दिन एक अरब सवालों के जवाब देता है और चैटजीपीटी अकेला एआई बॉट नहीं है। इस अमरीकी अध्ययन से मिले अनुमान के मुताबिक़ 2027 तक एआई इंडस्ट्री हर वर्ष डेनमार्क जैसे पूरे देश के मुक़ाबले चार से छह गुना ज़्यादा पानी इस्तेमाल करेगी।















