संयुक्त राष्ट्र की अन्तरराष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (ISA) की प्रमुख लैटीशिया कारवाल्हो ने स्पष्ट किया है कि गहरे समुद्री क्षेत्र, किसी एक देश या कम्पनी की सम्पत्ति नहीं है। आगे उन्होंने इस समृद्ध संसाधन क्षेत्र को, लूट-पाट और बेलगाम शोषण वाला मैदान बनने से रोकने के प्रयास का ज़िक्र किया।

आज जब दुनिया भर के देश, दुर्लभ खनिजों की तलाश में, समुद्र की गहराइयों में खोजने के लिए ग़ोते लगा रहे हैं, वहीँ इन सम्पत्तियों पर कई तरह के वर्चस्व के खतरे भी मंडरा रहे हैं। ऐसे में अपनी 30वीं वर्षगाँठ मना रहा अन्तरराष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण (International Seabed Authority) उन समुद्री क्षेत्रों का वैश्विक संगठन है, जो किसी भी देश की सीमाओं से बाहर स्थित हैं।
आईएसए प्रमुख लैटीशिया कारवाल्हो ने बताया कि अमरीका वैसे तो आईएसए का सदस्य नहीं है मगर वह अन्तरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में खनन से जुड़े आदेश पारित करके “अकेले” आगे बढ़ रहा है। नियम के मुताबिक़, देश अपने क्षेत्रीय जलक्षेत्र या “विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों” के भीतर गहरे समुद्र में खनन कर सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि अन्तरराष्ट्रीय समुद्र की गहराई “मानवता की साझा विरासत है, जोकि संयुक्त राष्ट्र के समुद्र क़ानून सन्धि में निहित सिद्धान्त है और हमें इसी मार्गदर्शन में आगे बढ़ना चाहिए।” उन्होंने आईएसए की वर्षगाँठ के अवसर पर सन्देश में कहा- “हमें जलवायु कार्रवाई, जैव विविधता संरक्षण और समुद्री संरक्षण के लिए अपने वैश्विक प्रयासों को एक साथ जोड़ना होगा।”
आईएसए को एक महाशक्ति बताते हुए लैटीशिया ने यूएन न्यूज़ से कहा कि बाक़ी दुनिया क़ानून के शासन और आईएसए के समर्थन में एकजुट है। आगे उन्होंने कहा कि हमारे पास पूरा ज्ञान, क़ानूनी अधिकार और ज़िम्मेदारी है। अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार, राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर का गहरा समुद्र क्षेत्र, किसी एक देश की सम्पत्ति नहीं है। इसी कारण उन्होंने अमेरिका से आईएसए में शामिल होने का आग्रह किया।
इन चिन्ताओं को ध्यान में रखते हुए आईएसए गहरे समुद्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसे शोषण में बदलने से बचाने के लिए, एक खनन नियमावली तैयार कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की 2025 की विश्व आर्थिक स्थिति और परिदृश्य रिपोर्ट के अनुसार, आईएसए ने अब तक 20 देशों की 21 कम्पनियों को खनिज अन्वेषण के लिए 31 अनुबन्ध दिए हैं।
अन्तरराष्ट्रीय नियमावली के अनुसार , बैटरी से लेकर सोलर पैनलों तक जैसे तकनीकी उत्पादों की माँग पूरी करने के लिए दुर्लभ खनिजों की आवश्यकता ने गहरे समुद्र और उसकी सम्भावनाओं में रुचि बढ़ा दी है।
समुद्र के तल की खोज में, कोबाल्ट से लेकर ज़िंक तक, कई दुर्लभ पृथ्वी तत्व पाए गए हैं। हालाँकि, अन्तरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यावसायिक खनन अभी शुरू नहीं हुआ है, क्योंकि आईएसए गहरे समुद्र में खनन के लिए एक अन्तरराष्ट्रीय नियमावली को अन्तिम रूप देने की प्रक्रिया में है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अन्तरराष्ट्रीय नियमावली लागू होने के बाद भी समुद्री तल में खनन करने वाले देश या कम्पनियाँ अनेक बड़ी चुनौतियों का सामना करेंगे। इसमें पारम्परिक खनन की तुलना में उच्च पूँजी की आवश्यकता और संचालन लागत शामिल हैं। साथ ही समुद्र के तल पर खनन से जुड़ी अनूठी तकनीकी जटिलताओं भी प्रमुख रुकावटें हैं।
लैटीशिया कारवाल्हो ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य, समुद्र के तल से नमूने इकट्ठा करना और संरक्षित करना है, जिससे सभी देशों, ख़ासतौर पर विकासशील देशों को फायदा होगा। इसके अलावा, यह पहल खनिजों, अन्वेषण और दोहन की सम्भावनाओं का अध्ययन करेगी। साथ ही समुद्री जीवों की विविधता और आनुवंशिकी का संरक्षण भी करना है।















