सिर्फ औरतों के हक की बात करना फेमिनिज्म नहीं- फातिमा सना शेख

एक्ट्रेस फातिमा सना शेख विक्की कौशल स्टारर ‘सैम बहादुर’ में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रोल में हैं।

सिर्फ औरतों के हक की बात करना फेमिनिज्म नहीं- फातिमा सना शेख

‘दंगल’ की गीता फोगाट के नाम से अपनी पहचान बना लेने वाली फातिमा सना शेख ने अपने छोटे से करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। फ़िलहाल उनकी आने वाली फिल्म ‘सैम बहादुर’ में वह आयरन लेडी इंदिरा गांधी की भूमिका निभा रही हैं।

साक्षात्कार में एक सवाल के जवाब में फातिमा कहती हैं कि वह उन बहुत कम औरतों में से हैं जिनके साथ बहुत कम ऐसा हुआ है, जहां आपको छोटा महसूस कराया गया है। आगे वह कहती हैं कि रही बात सशक्त महसूस करने की तो मेरे हिसाब से ये आप सिर्फ बड़ी नहीं, छोटी-छोटी चीजों में भी महसूस कर सकते हैं। मसलन, जब आप ने अपने दोस्त को बोला कि तुमको ये नहीं सहना चाहिए और उन्होंने आपकी बात मान ली हो या आप रास्ते में जा रहे हैं, कोई जानवर को मार रहा है तो आप उसके खिलाफ आवाज उठाते हैं।

अपनी सोच पर फातिमा का स्पष्ट जवाब था- ‘फेमिनिस्ट सिर्फ वही नहीं होता जो औरतों के हक के लिए आवाज उठाता है। फेमिनिस्ट वो भी होता है जो बराबरी में यकीन करता है, वो लिंग हो, जाति हो, धर्म हो, इंसान हो या जानवर हो, अगर आप सबके साथ बराबर नहीं है तो आप सच्चे फेमिनिस्ट नहीं हैं।’

मजबूत महिला किरदार पर फातिमा का कहना है, ‘मुझे लगता है कि पहले भी ऐसी फिल्में बनती थीं। जैसे नर्गिस जी ने मदर इंडिया और कई ऐसी फिल्में की हैं। हमारी पीढ़ी के पहले भी प्रियंका चोपड़ा या विद्या बालन ने ऐसी स्ट्रॉन्ग महिला किरदारों वाली फिल्में की हैं। मुझे लगता है कि हर सदी में ऐसी फिल्में आती हैं। पहले कम आती थीं, अब ज्यादा आती हैं क्योंकि जितनी जागरूकता बढ़ती है, उतनी चर्चा होती है, हम समाज के बनाए ढर्रे को चुनौती भी देते हैं। उस वजह से वैसे रोल ज्यादा लिखे जा रहे हैं।’

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