आतिशबाज़ी से पक्षियों में भी बढ़ जाता है तनाव

कैम्ब्रिज: ऑस्ट्रिया में ग्रे डक पर किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि आतिशबाजी पक्षियों को नुकसान पहुंचती है। अध्यन के मुताबिक़ पटाखे का प्रयोग जंगल में रहने वाले पक्षियों के तनाव का कारण बन सकता है।

आतिशबाज़ी से पक्षियों में भी बढ़ जाता है तनाव

शोधकर्ताओं ने अस्थायी रूप से उत्तरी ऑस्ट्रिया में अल्मसी झील में रहने वाले 20 जंगली भूरे बतखों में ट्रांसमीटर लगाए। इस झील के पास के गाँव में नए साल की पूर्व संध्या पर आधी रात को आतिशबाजी का प्रदर्शन होता है।


आतिशबाज़ी के कारण बतख की हृदय गति में औसतन 96 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उनके शरीर का तापमान भी 3 फीसद तक बढ़ गया।


पक्षियों में प्रत्यारोपित ट्रांसमीटरों ने पक्षियों की हृदय गति और शरीर के तापमान को रिकॉर्ड किया, जो उनके शरीर के तनाव का माप था।

एंग्लिया रस्किन यूनिवर्सिटी के डॉ क्लाउडिया वॉशर के नेतृत्व में किए गए शोध में नए साल की पूर्व संध्या के पहले घंटे में दोपहर 12 बजे से 1 बजे के बीच बतख की हृदय गति में औसतन 96 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं उनके शरीर का तापमान भी 3 फीसद यानी 38 डिग्री सेल्सियस से 39 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया।

दोपहर 1 बजे से 2 बजे के करीब जब आतिशबाजी खत्म हुई, तो बत्तखों की हृदय गति सामान्य से 31 प्रतिशत अधिक थी, जबकि उनके शरीर का तापमान सामान्य से 3 प्रतिशत अधिक था।

ट्रांसमीटर के आंकड़ों के अनुसार पक्षियों की हृदय गति और शरीर के तापमान को सामान्य होने में लगभग पांच घंटे लग गए, और 1 जनवरी को सुबह 5 बजे नियमित माप दर्ज किए गए।

जर्नल कन्वर्सेशनल फिजियोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन कहता है- बहुत से लोग आतिशबाजी का आनंद लेते हैं, लेकिन प्रदर्शन की योजना बनाते समय घरेलू और जंगली दोनों तरह के जानवरों पर विचार किया जाना चाहिए।

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