केंद्र ने कहा- मरने वाले किसानों का कोई डेटा नहीं, इसलिए मुआवजे का कोई सवाल ही नहीं

नई दिल्ली: तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर केंद्र सरकार ने बीते रोज़ कहा कि साल भर से चल रहे आंदोलन के दौरान कितने किसानों की मौत हुई है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है, इसलिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रश्न ही नहीं उठता। लोकसभा में सांसदों के एक समूह द्वारा ‘कृषि कानूनों के आंदोलन’ पर उठाए गए सवालों के जवाब मेंकेंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह बात कही।

केंद्र ने कहा- मरने वाले किसानों का कोई डेटा नहीं, इसलिए मुआवजे का कोई सवाल ही नहीं

मंत्रालय का इस पर स्पष्ट उत्तर था कि इस मामले में उसके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है और इसलिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रश्न ही नहीं उठता। सांसद आंदोलन के संबंध में अन्य सवालों के साथ किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या जानना चाहते थे। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी में और उसके आसपास चल रहे आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों की संख्या पर डेटा और क्या सरकार का उक्त आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का विचार है, इसकी जानकारी भी मांगी गई थी।

किसान नेताओं ने आंदोलन के दौरान मृतक किसानों को शहीद किसान कहा है। एक साल से अधिक समय से चल रहे आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और मृतक किसानों को मुआवजे का भुगतान करने की भी मांग की गई है। किसान आंदोलन के दौरान मृतक किसानों के परिजनों के लिए पुनर्वास की मांग भी की गई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया है कि पिछले साल से आंदोलन के दौरान लगभग 700 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं

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