ह्यूमन राइट्स ने दी ख़ास ख़बर- सीरिया के इदलीब-हामा में 24 घंटे में भीषण संघर्ष, 66 लोगों की मौत

बेरूत: सीरिया के पश्चिमोत्तर इदलिब प्रांत में रूस समर्थित सत्तारूढ़ बलों तथा जिहादियों एवं विद्रोही लड़ाकों के बीच संघर्ष में 66 लोग मारे गए हैं.

ब्रिटेन स्थित सीरियन आब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा कि मरने वालों में कम से कम 19 आम नागरिक शामिल हैं जिनकी मौत हवाई हमलों में हुई.

 

यह आंकड़ा बीते 24 घंटे में इदलिब एवं हामा प्रांतों के बीच संघर्ष में हुए हताहतों का है. इस संस्था के प्रमुख रामी अब्दुल रहमान ने कहा कि मारे गये आम लोगों में सात बच्चे शामिल हैं. उन्होंने कहा कि 27 सैनिक और अर्द्धसैनिक इकाइयों के सदस्य तथा शासन विरोधी 20 लड़ाके भी मारे गये हैं.

 

वहीं दूसरी ओर अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि रूस के साथ ‘खराब संबंधों’ के बावजूद वॉशिंगटन को सीरिया सहित कई समान हित वाले क्षेत्रों में रूस के साथ काम करने की जरूरत है.

 

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की गुरुवार (28 दिसंबर) की रिपोर्ट के अनुसार, टिलरसन ने ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में प्रकाशित अपने लेख में कहा “अमेरिका का वर्तमान में फिर से उभर रहे रूस के साथ खराब संबंध है.”

 

रूस और अमेरिका के बीच साल 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में कथित रूसी हस्तक्षेप और पूर्वी यूक्रेन मुद्दे को लेकर सार्वजनिक तौर पर टकराव देखे गए हैं. शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने लिखा कि जब तक यूक्रेन मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान नहीं हो जाता तब तक रूस के साथ सहज व सामान्य व्यवहार नहीं हो सकता है.

 

इस महीने की शुरुआत में अमेरिका का फिर से पूर्वी यूक्रेन मुद्दे पर रूस के साथ टकराव हुआ था, जब वह यूक्रेन को उन्नत हथियार बेचने की तैयारी कर रहा था और पूर्वी यूक्रेन में हिंसा को कम करने के लिए रूस से बात कर रहा था. हथियार बेचने की प्रक्रिया पर रूस ने कहा था कि इससे नए खूनखराबे का रास्ता साफ होगा.

 

लेख में टिलरसन ने लिखा है कि समान हित के मुद्दों पर अमेरिका, रूस के साथ मिलकर काम करना चाहता है और यह हित सीरिया से अधिक कहीं और नजर नहीं आते.

 

इससे पहले सीरिया के प्रभावशाली कट्टरपंथियों समेत 36 से ज्यादा विद्रोही समूहों ने गृह युद्ध को खत्म करने पर सोचि में अगले महीने रूस के नेतृत्व में होने वाली वार्ता की पहल को खारिज कर दिया.

 

सीरियाई सरकार के अहम सहयोगी रूस और ईरान विपक्षी समर्थक तुर्की के साथ शुक्रवार (23 दिसंबर) को इस बात पर सहमत हुए कि 29 और 30 जनवरी को काला सागर के सोचि रिजॉर्ट में ‘‘कांग्रेस ऑफ नेशनल डायलॉग’ आयोजित किया जाए.

 

सीरियाई सरकार ने कहा कि वह इसमें शामिल होगी, लेकिन विद्रोहियों ने अपने कदम वापस खींच लिए. विद्रोहियों ने इसे जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाली प्रक्रिया को रोकने की कोशिश बताया.

 

विद्रोहियों ने सोमवार (25 दिसंबर) को प्रकाशित एक संयुक्त बयान में कहा, ‘‘हम जिनेवा प्रक्रिया को नाकाम बनाने की रूस की कोशिश को पूरी तरह खारिज करते हैं. हम सभी ताकतों से इन चिंताजनक खतरों के खिलाफ खड़े होने का आह्वान करते हैं.’’ चालीस विद्रोही समूहों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं.

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