जेन Z कर्मचारी हफ्ते में 3.4 दिन ऑफिस से काम करना पसंद करते हैं: रिपोर्ट

काम और काम करने वालों के बीच समय देने को लेकर जमा की गई एक जानकारी के आंकड़े काफी दिलचस्प हैं। इसी सप्ताह सामने वाली एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जेनरेशन Z के कर्मचारी औसतन हफ्ते में 3.4 दिन ऑफिस से काम करना पसंद करते हैं। कर्मचारियों यह संख्या मिलेनियल्स से ज्यादा है, जबकि जेनरेशन X और बेबी बूमर्स के मुकाबले यह थोड़ी कम है।

सैविल्स इंडिया की एक रिपोर्ट के हवाले से जो नतीजे मिले हैं उसके मुताबिक़, ‘जेनरेशन Z’ (Gen Z) कर्मचारी हफ्ते में 3.4 दिन ऑफिस से काम करना पसंद करते हैं। यह संख्या ‘मिलेनियल्स’ (millennials) से तो ज्यादा है, लेकिन ‘जेनरेशन X’ (Generation X) और ‘बेबी बूमर्स’ (Baby Boomers) से कम है।

रिपोर्ट से इस पीढ़ी के रहने के अंदाज़ का भी पता चलता है। पड़ताल बताती है कि इस पीढ़ी के लोग, वर्क-लाइफ बैलेंस, भरोसेमंद वाई-फाई, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और वेलनेस सुविधाओं को काफी अहमियत देते हैं।

सैविल्स इंडिया की रिपोर्ट पर नज़र डालें तो यह भी मालूम होता है कि, जेनरेशन Z यानी वह आबादी जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है, के कर्मचारी अच्छी वाई-फाई सुविधा चाहते हैं। साथ ही, वे चाहते हैं कि उनका ऑफिस पब्लिक ट्रांसपोर्ट, जिम और पिलेट्स स्टूडियो के करीब हो। बताते चलें कि पिलेट्स स्टूडियो एक विशेष प्रकार का शारीरिक और मानसिक व्यायाम केंद्र है जो मुख्य रूप से शरीर शरीर में लचीलेपन, संतुलन और सही शारीरिक मुद्रा को सुधारने पर केंद्रित होता है।

रिपोर्ट बताती है कि आमतौर पर युवा कर्मचारी ऑफिस में कम दिन बिताना पसंद करते हैं, लेकिन जेनरेशन Z का रुझान इससे थोड़ा अलग है। फिलहाल, सभी पीढ़ियों के कर्मचारी हफ्ते में लगभग चार दिन ऑफिस जा रहे हैं।

एक तरफ जहाँ युवा मिलेनियल्स हफ्ते में 3.2 दिन ऑफिस जाना पसंद करते हैं वहीँ उम्र में थोड़े बड़े मिलेनियल्स के लिए यह संख्या 3.3 दिन है। जेनरेशन X और बेबी बूमर्स की बात करें तो इन्हें हफ्ते में 3.5 दिन ऑफिस जाना पसंद है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भले ही जेनरेशन Z के लोग अन्य उम्र समूहों की तुलना में ज्यादा बार ऑफिस जाते हैं, फिर भी वे ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ को बहुत महत्व देते हैं। जेनरेशन Z के सभी लोगों का कहना है कि उनके लिए यह ‘काफी’ या ‘बहुत ज्यादा’ महत्वपूर्ण है।

सैविल्स इंडिया के रिसर्च एंड कंसल्टिंग विभाग के मैनेजिंग डायरेक्टर अरविंद नंदन का कहना है कि “जैसे-जैसे भारत का वर्कफोर्स बदल रहा है, कंपनियों को यह सोचना होगा कि वर्कप्लेस डिजाइन, भरोसेमंद तकनीक और कनेक्टिविटी के जरिए ऑफिस जाने के अनुभव को कैसे और सार्थक बनाया जा सकता है। युवा कर्मचारियों की उम्मीदों के अनुरूप वर्कप्लेस तैयार करने के लिए, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और आस-पास मौजूद जीवनशैली से जुड़ी सुविधाओं का होना भी बहुत जरूरी होगा।”

‘जनरेशन Z’ का कहना है कि उन्हें आने-जाने में सबसे ज़्यादा समय लगता है। इनमें से 46 प्रतिशत लोग 41 मिनट या उससे ज़्यादा समय तक यात्रा करते हैं। इसकी मुख्य वजह यह हो सकती है कि शहर के केंद्रों से दूर ज़्यादा किफायती घर मौजूद हैं।

हालाँकि सभी आयु समूहों के बीच, आस-पास की सुविधाओं में ‘रेस्तरां’ को सबसे अच्छी रेटिंग मिली है, जबकि जिम और वेलनेस सेंटर युवाओं को ज़्यादा आकर्षित करते हैं।

कार्यप्रणाली
सैविल्स वर्ल्ड रिसर्च ने 4 से 18 सितंबर 2026 के बीच ‘इम्पैक्ट्स जेनरेशनल प्रेफरेंसेज सर्वे’ (पीढ़ियों की प्राथमिकताओं पर सर्वेक्षण) आयोजित किया, जिसमें विश्व स्तर पर 645 लोगों की प्रतिक्रियाएं एकत्र की गईं।

इसके निष्कर्ष सर्वेक्षण में शामिल लोगों के समूह (सैंपल) को दर्शाते हैं। इन्हें किसी विशेष पीढ़ी या क्षेत्र के हर एक व्यक्ति का प्रतिनिधित्व मानने के बजाय, उत्तरदाताओं के बीच मौजूद अंतरों को दर्शाने वाले संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए।

इस सर्वेक्षण के लिए, विभिन्न पीढ़ियों (जेनरेशनल कोहॉर्ट्स) को इस प्रकार परिभाषित किया गया है:

बेबी बूमर्स: 1946–1964 के बीच जन्मे
जेनरेशन X: 1965–1980 के बीच जन्म
एल्डर मिलेनियल्स: 1981–1988 के बीच जन्मे
यंगर मिलेनियल्स: 1989–1996 के बीच जन्मे
जेनरेशन Z: 1997–2012 के बीच जन्मे

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