‘पिछले 15 सालों में युवाओं को शारीरिक रूप से सक्रिय बनाने की दिशा में दुनिया ने लगभग कोई प्रगति नहीं की है, और इसमें लड़कियां सबसे पीछे छूट गई हैं।’ यह कहना है विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस का।
डब्ल्यूएचओ द्वारा बुधवार को जारी नए वैश्विक अनुमानों पर एक नज़र डालें तो इस रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया भर में हर चार किशोरों में से एक ने पिछले हफ्ते किसी भी दिन उन्हें कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि करने का मौका नहीं मिलने की बात कही है।
रिपोर्ट यह भी बताती है-
11 से 17 साल की उम्र के लगभग 24 करोड़ युवाओं ने बताया कि वे किसी भी दिन कम से कम 60 मिनट की मध्यम से लेकर तेज शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाए।
औसतन, किशोरों ने बताया कि वे हफ्ते में केवल 2.7 दिन शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, और केवल 14 प्रतिशत ने कहा कि वे सातों दिन सक्रिय रहते हैं।
लेक्चर के बजाए बुनियादी ढांचे पर फोकस की ज़रूरत
रिपोर्ट से मिलने वाले यह नतीजे बताते हैं कि, साल 2010 के बाद से किशोरों के बीच शारीरिक गतिविधि के स्तर में लगभग कोई बदलाव नहीं आया है। इस आधार पर कह सकते हैं कि पिछले 15 सालों में वैश्विक स्तर पर कोई खास प्रगति नहीं हुई है।
बेहतर समाधान
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसका समाधान यह नहीं है कि किशोरों से और अधिक कोशिश करने के लिए कहा जाए। बल्कि, हमें ऐसे स्कूल, सड़कें और समुदाय बनाने होंगे, जहां शारीरिक गतिविधि करना, खेलना और सक्रिय रहना सुरक्षित, आसान और सामान्य बात हो।
सभी देशों में निष्क्रियता का माहौल
इस बात को स्पष्ट करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन से एक इन्फोग्राफिक में एक बार चार्ट के जरिए दिखाया गया है। इन्फोग्राफिक (Infographic) जानकारी, डेटा या ज्ञान का एक विजुअल या चित्रात्मक प्रस्तुति है, जो जटिल विषयों को सरल, स्पष्ट और जल्दी समझने योग्य बनाता है। इसके लिए किशोरों की झूला झूलती हुई तस्वीर की मदद ली गई है। इस तस्वीर से पता चलता है कि कितनी लड़कियां और लड़के बिल्कुल भी सक्रिय नहीं है। वहीँ कितने सातों दिन सक्रिय रहते हैं। यह बताता है कि सभी क्षेत्रों में लड़कियां लड़कों की तुलना में कम सक्रिय हैं।
यह रिपोर्ट 11-17 वर्ष की आयु के किशोरों में शारीरिक गतिविधि का नवीनतम वैश्विक आकलन प्रस्तुत करती है। इसमें 140 देशों और क्षेत्रों के 389 जनसंख्या-आधारित सर्वेक्षणों और 32 लाख से अधिक किशोरों के डेटा का उपयोग किया गया है।
2025 में, हर चार में से एक किशोर ने बताया कि पिछले सप्ताह में उन्होंने एक भी दिन कम से कम 60 मिनट की मध्यम से लेकर जोरदार शारीरिक गतिविधि नहीं की, जबकि केवल 14 प्रतिशत किशोरों ने बताया कि वे सातों दिन शारीरिक रूप से सक्रिय रहे। लड़कों की तुलना में लड़कियां लगातार कम सक्रिय पाई गईं, और विभिन्न देशों के बीच इसमें काफी अंतर देखने को मिला।
2010 के बाद से किशोरों की शारीरिक गतिविधि के वैश्विक स्तर में बहुत कम बदलाव आया है। कोई भी देश 2030 तक शारीरिक निष्क्रियता में 15 प्रतिशत की कमी लाने के वैश्विक लक्ष्य को हासिल करने की राह पर नहीं है।
यह रिपोर्ट विभिन्न क्षेत्रों में त्वरित और समन्वित कार्रवाई का आह्वान करती है, ताकि किशोरों के लिए सक्रिय रहने के सुरक्षित, सुलभ, किफायती और आनंददायक अवसर पैदा किए जा सकें। इसमें विशेष रूप से लैंगिक अंतर को कम करने, सबसे कम सक्रिय किशोरों तक पहुंचने, असमानताओं को घटाने, और कार्रवाई को दिशा देने तथा प्रगति की निगरानी के लिए डेटा और साक्ष्यों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2030 तक शारीरिक निष्क्रियता में 15 प्रतिशत की कमी लाने के वैश्विक लक्ष्य को पूरा करने की राह पर कोई भी देश नहीं है। अगर इस दिशा में तेजी से कदम नहीं उठाए गए, तो इस दशक के बाकी समय में भी किशोरों की शारीरिक निष्क्रियता का स्तर लगभग वैसा ही बना रहने का अनुमान है।